संतोष गंगवार, महेश शर्मा बैठक से हरीश रावत की मुलाकात

संतोष गंगवार, महेश शर्मा बैठक से हरीश रावत की मुलाकात

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 23 जून 2015 को केन्द्रीय कपड़ा मंत्री, स्वतंत्र प्रभार श्री संतोष गंगवार से उनके कार्यालय में उत्तराखण्ड में कपड़ा नीति, बुनकरों की सहायता, हथकरघा क्लस्टर्स को बढाए जाने तथा रेशम एवं बांज टसर के विस्तारीकरण किए जाने संबंधी अनेक बिन्दुओं पुनः बैठक की इससे पहले भी उत्तराखण्ड राज्य मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर बैठक कर चुके हैं।

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मुख्यमंत्री ने पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में मात्र जनसंख्या घनत्व कम होने को आधार मान कर छोटे हथकरघा क्लस्टर(10 बुनकर) को बंद नहीं किये जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटा राज्य होने के कारण यहां कम आबादी और दुर्गम क्षेत्रों में लोग इस प्रकार के लघु व्यवसायों से अपनी आजीविका चलाते हैं और ये स्थानीय लोग इनक कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो सकें इसके लिए योजनाओं को निरंतर चलाया जाना जरूरी है। केन्द्रीय कपड़ा मंत्री को केंद्र सरकार की प्रस्तावित टेक्सटाईल नीति के संदर्भ मंें उत्तराखण्ड द्वारा प्रदेश में टेक्सटाइल पार्क की स्थापना हेतु टेक्सटाइल नीति में संशोधन संबंधी प्रस्ताव अपने पत्र के साथ प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के मैदानी क्षेत्रों में हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही धर्मों में छीपी समुदाय वर्षों से बुनाई-छपाई के व्यवसाय में कार्यरत है परन्तु विशेषज्ञता होने के बावजूद वित्तीय संसाधनों के अभाव से यह पारम्परिक कार्य काम लुप्त होने की अवस्था में है जिसे केन्द्र सरकार की सहायता की नितांत आवश्यकता है। राज्य के पर्वतीय जनजातीय क्षेत्रों में ऊन से बुनाई के काम में लगी जनजातियों को अपने समान की उचित विपणन सहायता व अन्य आवश्यक सुविधांए न मिलने से यह पारम्परिक व्यवसाय भी लुप्तावस्था की ओर अग्रसर है। इसके व्यापक उपचारार्थ एक ऊन बैंक स्थापित किऐ जाने एवं अन्य वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। डाई इकाइयों के मशीनीकरण व पर्वतीय क्षेत्रों में सिल्क व बांज टसर के संवर्धन के लिए भारत सरकार से विशेष सहायता की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि राज्य द्वारा जोशीमठ व मुन्स्यारी में मिनी टेक्सटाईल पार्क स्थापित किए जाने  योजना है। मुन्स्यारी के मिनी टेक्सटाईल पार्क में ऊन से सम्बन्धित वस्त्रों का निर्माण किया जायेगा। इसे पर्यटन एवं फैशन से संबद्ध किए जाने की आवश्यकता है, जिससे स्थानीय लोगों को व्यवसाय में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने राज्य में सिल्क और टसर के संवर्धन को पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए भी भारत सरकार से सहायता की मांग की साथ ही आक के वृक्षों के संरक्षण सम्बंधी गतिविधियों को भी बढ़ायें जाने के प्रयासों को भी जरूरी बताया।

मुख्यमंत्री ने हथकरघा व्यवसाय के विकास को जिला एवं राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए राज्य की ओर से भारत सरकार के समक्ष रखे प्रस्ताव के लिए वित्तीय सहायता की मांग की। मुख्यमंत्री ने राज्य के निवासियों के हितों के लिए बनाये गये हथकरघा से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर केंद्र से शीघ्र ही जरूरी निर्णय लेते हुए वित्तीय सहायता दिये जाने की मांग की।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रस्तावांे पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिये जाने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सस्कृति, पयर्टन एवं नागरिक उड्डयन(स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री महेश शर्मा से उनके कार्यालय में मुलाकात कर मुख्यमंत्री ने नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण उत्तराखण्ड को एक पर्यटन प्रदेश के रूप में विकसित करने के सम्बंध में विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने 13वें वित्त आयोग की संस्तुतियों में राज्य को पर्यटन की विशेष योजनाओं के लिए 63 करोड़ रूपये की अवशेष धनराशि जो वित्त मंत्रालय भारत सरकार की संस्तुतियों के बाद भी अब तक अवमुक्त नहीं हो पायी है उस राशि को राज्य हित में शीघ्र जारी किये जाने की मांग की।

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मुख्यमंत्री ने टिहरी झील को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 500.00 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान किये जाने का भी अनुरोध किया एवं राज्य के प्रमुख पर्यटक स्थलों को रोपवे के माध्यम से जोड़ने के लिए 500.00 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता की मांग की।

भारत सरकार की ओर से वर्ष 2008-09 से वर्ष 2013-14 के अंतर्गत कुल 36 योजनाओं के लिए 287.00 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी थी इस स्वीकृति के बाद राज्य सरकार को दो किश्तों में अभी तक मात्र 135.00 करोड़ रूपये की राशि ही प्राप्त हो सकी है जिसकी अवशेष धन राशि मुख्यमंत्री नेे शीघ्र अवमुक्त किये जाने की मांग की। वहीं पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पिछले वर्ष की योजनाओं के स्वरूप में परिवर्तन करते हुए ‘‘स्वदेश दर्शन’’ एवं ‘‘प्रसाद’’ योजना प्रारम्भ की गयी हैं, जिसके कारण गत वर्षो में में स्वीकृत अपूर्ण योजनाआंे में अवशेष धनराशि अवमुक्त किये जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। एवं पयर्टन मंत्रालय भारत सरकार से उत्तराखण्ड राज्य को 143.00 करोड़ रूपये की धनराशि वांछित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड राकेश शर्मा, स्थानिक आयुक्त एसडी शर्मा भी उपस्थित रहे।

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