शानदार उत्तराखंड, मनभावन उत्तराखंड

शानदार उत्तराखंड, मनभावन उत्तराखंड

पहाड़ों की खूबसूरती ऐसी होती है जो किसी को भी बरबस अपनी तरफ आकर्षित कर लें । उॅंची -उॅंची पहाडि़़याॅं सर्दियों में बर्फ से ढकी नदियाॅं, सीढ़ीनुमा खेत , घाटियाॅं जाड़ो की गुनगुनी धूप और गर्मी की शीतलता पहाड़ों की ओर आने को आकर्षित करते है ं।

 

डॉ मंजू पांडे

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देवभूमि उत्तराखंड़ भारत के उत्तर में स्थित है । उत्तराखंड़ का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग से है । इस राज्य में भारत की सबसे बड़ी नदियो गंगा, यमुना का उद्गम स्थल हैं ।  9 नबम्वर 2000 को उत्तराखंड़ भारत के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उत्तराखंड़ राज्य के दो क्षेत्र है – कुॅंमाउ और गढ़वाल । इन दोंनों ही क्षेत्र में प्रकृति का अपार र्सौन्दर्य है । पहले हम आपको उत्तराखंड़ के गढ़वाल से अवगत कराते है । वैसे तो गढ़वाल देखने योग्य कई पर्यटक स्थल है । उनमें से कुछ की जानकारी हम आपको दे रहे है –

ऋषिकेश – गढ़वाल में स्थित ऋषिकेश पर्यटन के लिए सबसे आकर्षक स्थल है । यहाॅं लक्ष्मण झूला , वशिष्ठ गुफा , नीलकंठ महादेव , जैसे मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थल है । ऋषिकेश का प्राकृतिक सौन्दर्य देखने योग्य है । नीलकंठ महादेव का मंदिर ऋषिकेश का मुख्य आकर्षक स्थल है । ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया था । उसी समय उनकी पत्नी ने उनका गला दबाया जिससे विष उनके पेट में न पहुॅुचें । विषपान के बाद विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया था । गला नीला पड़ने के कारण ही उनको नीलकंठ नाम से जाना गया था । मंदिर के परिसर का दृश्य बड़ा ही मनोरम है । भक्तगण मंदिर के दर्शन से पहले वहाॅं स्थित झरने में स्नान करते है । मंदिर के शिखर तल पर समुद्र मंथन के दृश्य को चितित्र किया गया है । सामने पहाड़ी पर शिव की पत्नी पार्वती जी का मंदिर है ।

मसूरी – पर्वतों की रानी कहलाने वाला मसूरी देहरादून से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । यह पर्यटन स्थल हिमालय पर्वतमाला के शिवालिक श्रेणी में पड़ता है । इसी कारण यह पर्यटकों को परिमहल जैसा प्रतीत होता है । मसूरी गंगोत्री का प्रवेश द्वार भी है । मसूरी के प्रमुख आकर्षक स्थल गन हिल , म्युनिसिंपल गार्डन , तिब्बति मंदिर , चाइल्डर्स लाॅंज , केम्पटीफाॅंल , नाग देवता का मंदिर , मसूरी झील , सर जार्ज एवरेस्ट हाउस आदि है । मसूरी खूबसूरत पर्यटन स्थल के अलावा अपने शैक्षिक संस्थानों के लिए भी प्रसिद्व है । इस पर्यटन स्थल की सबसे मजेदार एक्टिविटि र्टैकिंग होती है जिसका भरपूर आनन्द यहाॅं आकर उठाया जा सकता है ।

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मसूरी की प्रसिद्वि का एक कारण यह भी है कि यहाॅं रस्किन बांड जैसे महान लेखक का निवास स्थान है । रस्किन को प्रकृति से गहरा लगाव है । इसलिए उन्होंनें मसूरी को अपना आशियाना बनाया । कमरे की खिड़की से पहाड़ों , पेडों , और सड़को पर आने- जाने वाले सैलानियों की झलक उन्हें लिखने की पे्ररणा देती है । 81 साल के हो चुके रस्किन बांड अपने दत्तक पुत्र और उसके परिवार के साथ मसूरी के लैंडोंर इलाके में रहते हैं । वहां अक्सर उन्हें किसी बुक शाॅंप या टी- स्टॅंाल पर सैलानियों के संग गपशप करते हुए देखा जा सकता है ।

हरिद्वार – मसूरी ऋषिकेश की तरह हरिद्वार भी उत्तराखंड़ का प्रसिद्व पर्यटक स्थल है । हरिद्वार का अर्थ है हरि का द्वार अर्थात् भगवान तक पहुॅंचने का रास्ता । यह शहर उत्तराखंड़  राज्य की पहाडि़यो में स्थित एक पवित्र और प्रमुख तीर्थ स्थल भी है । यह पवित्र शहर भारत के सात पवित्र शहरों अर्थात् सप्तपुरी में से एक है । हरिद्वार का सबसे पवित्र स्थल हर की पौड़ी है । माना जाता है यहाॅं स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है । वह स्थान जहाॅं पर अमृत की बॅंूदें गिरि थी उसे हर की पौड़ी पर ब्रहम कुण्ड माना जाता है । हर की पौड़ी हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट है । यह वह स्थान है जहाॅं गंगा पहाड़ों को छोड़ कर मैदानों में प्रवेश करती है । हर का पौड़ी के अलावा हरिद्वार में माया देवी , मनसा देवी चंडी देवी के मंदिर है । ये तीनों ही शक्ति पीठ पूजा के वे स्थल है जो हिन्दू देवी सती या शक्ति को समर्पित है ।

अभी तक हमनें अपको उत्तराखंड़ के गढ़वाल मंडल में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों से अवगत कराया । अब हम अपको कुमाॅंउ मंडल में स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी देते है । गढ़वाल की तरह कुमाॅंउ में भी अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य है । सबसे पहले बात करते है नैनीताल की –

 

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नैनीताल – यह कुमाॅंउ की पहाडि़यो के मध्य में स्थित है और इसे खूबसूरत झीलों का आशीर्वाद प्रा्रप्त है। नैनीताल को सरोवर नगरी भी कहा जाता है । मान्यता है कि यहाॅं तीन संत अत्री , पुलस्त्य और पुलाह आकर रूकें थे । इन्हें अपनी प्यास मिटाने के लिए जब कहीं पानी नही मिला तो इन्होंनें एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से लाए गए जल से इस गढ्ढे को भर दिया । तब से नैनीताल अस्तित्व में आया । इसलिए इसे त्रिऋषि सरोवर भी कहा जाता है ं। नैनीताल अपनी खूबसूरती और शान्त परिवेश के कारण पर्यटको के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है । नैनीताल के आस- पास बहुत से पर्यटक स्थल है जैसे – हनुमान गढ़ी , किलवरी , लडियाकाॅंटा , खुर्पाताल , नौकुचियाताल , भीमताल , सातताल , नैनापीक , टिफिन- टाॅप , राजभवन चिडि़याॅंघर ,फलैट्स ,,नैनीताल के पर्यटक स्थल है ं इसके अलावा ठ़डी सड़क , गुआनो हिल और अरविन्दो आश्रम भी देखने योग्य है ।

 

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रानीखेत – यदि आप प्रकृति को नजदीक से देखना चाहते है और वास्तविक  प्राकृतिक स्थान का आनन्द उठाना चाहते है तो रानीखेत से उत्तम पर्यटन स्थल कोई नही हो सकता । हिमाच्छादित पर्वत , घाटियाॅं , चीड , देवदार के लम्बे -लम्बे वृक्ष , भाॅंति- भाॅंति के पक्षी , प्रदूषण से दूर रानीखेत में अलौकिक सौन्दर्य हैं । समुद्र तल से 1830 मीटर की उचाॅंई और लगभग 25 वर्ग किलोमीटर में फैला है रानीखेत । लोककथाओं के अनुसार रानी पद्मिनी कुमाॅंउ क्षेत्र की सुन्दर रानी रानीखेत आयी थी और इस जगह की खूबसूरती की कायल हो गई । इसलिए उनके पति राजा सुख हरदेव ने इस स्थान पर एक महल का निर्माण कराया । और इसे रानीखेत का नाम दिया । चारों ओर से हिमाच्छादित पर्वतो की चोंटियाॅं सुबह , दोपहर , शाम अलग -अलग रंग की दिखाई पड़ती है । रानीखेत की सुन्दरता को देखते हुए नीदरलैन्ड़ के रातदूत वान पैलेन्ट ने कहा ‘ जिसने रानीखेत नही देखा उसने  भारत को नही देखा ।’

झूलादेवी मंदिर और विनसर महादेव रानीखेत को प्रमुख दर्शनीय स्थल है । झूलादेवी का मंदिर हिन्दू देवी दुर्गा को समर्पित है। रानीखेत से 15 किलोमीटर की दूरी पर विनसर महादेव स्थित है । यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । विनसर महादेव का मंदिर देवदार के जंगल से घिरा है और यहाॅं एक प्राकृतिक झरना है ।

कुमाॅंउ रेजीमेन्टल सेंटर , संग्राहलय , और स्मारक पर्यटको के लिए मुख्य आकर्षण केन्द्र है । यह रानीखेत के सैनिकों द्वारा दिखाई गई बहादुरी और बलिदान को दर्शाता है । इसके अलावा उपट नामक स्थान है जो गोल्फ खेलने वालों के लिए स्वर्ग है । 9 गढ्ढे वाला गोल्फ कोर्स वर्तमान में देश के सबसे अच्छे गोल्फ कोर्स में गिना जाता है ।

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रानीखेत के अन्य दर्शनीय स्थल सदर बाजार , माल रोड , चैखुटिया , द्वाराहाट , मालू बाॅंध , ताडीखेत , कुमाॅंउ रेजीमेन्ट , गोल्फ कोर्स , छावनी , आशियाना पार्क , सनसेट प्वाइंट , माउटेन बाइंकिगं , ट्रैकिंग , आदि साहासिक खेल पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करते है ं

जागेश्वर – नैनीताल से 100 किलोमीटर की दूरी पर जागेश्वर स्थित है । यह 12वाॅं ज्योर्तिलिंग है । यहाॅं का प्राकृतिक सौन्दर्य मन मोह लेता है ं।

कौसानी – अल्मोड़ा से 52 किलोमीटर उत्तर में कौसानी स्थित है । हिमालय में बहुत ही कम पर्यटक ऐसे है जिनकी तुलना हम कौसानी से कर सकते है । महात्मा गाॅंधी ने कौसानी को भारत का स्विट्जरलैंड कहा था ।

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