पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को खेती के प्रति जागृत करना बड़ी चुनौती: हरीश रावत

पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को खेती के प्रति जागृत करना बड़ी चुनौती: हरीश रावत
प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यस्था के लिए कृषि एवं इससे जुडी अन्य गतिविधियों जैसे कि हार्टीकल्चर, फ्लोरिकल्चर, सब्जी उत्पादन, फलोत्पादन को प्राथमिकता देनी होगी
खेती की तकनीक को किसानों तक सरल रूप में पहुंचाना होगा। पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को खेती के प्रति जागृत करना बड़ी चुनौती है। इसके लिए किसानों, विभागीय अधिकारियों व कृषि वैज्ञानिकों में सामंजस्य स्थापित करना होगा। गुरूवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उŸाराखण्ड औद्योनिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (भरसार) के सेलाकुई स्थित शोध एवं प्रसार केन्द्र मे नवनिर्मित भवनों का आज यहां लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने भरसार फ्रूट हारवेस्टर की लाॅचिंग के साथ-साथ ‘‘हाॅर्टी-फाॅरेस्ट्री रिसोर्सेज आॅफ वेस्टर्न हिमालयज‘‘ पुस्तक का विमोचन भी किया।
CM photo 02, 13 August 2015
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यस्था के लिए कृषि एवं इससे जुडी अन्य गतिविधियों जैसे कि हार्टीकल्चर, फ्लोरिकल्चर, सब्जी उत्पादन, फलोत्पादन को प्राथमिकता देनी होगी। कृषि वैज्ञानिकों को ऐसी तकनीक विकसित करने पर बल देना चाहिए जो कि कम लागत के साथ अधिक प्रतिफल सुनिश्चित करें। कृषि मे शोध का लाभ खेतों तक होना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि पिछले वर्षो में राज्य में शिक्षा, कृषि शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, मेडिकल शिक्षा पर बजट का 18 प्रतिशत तक खर्च किया गया है परन्तु प्राप्त परिणामों में यह प्रदर्शित नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा किये जा रहे खर्च की सार्थकता भी दिखनी चाहिए। उन्होने भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति से कुछ गांव चयनित कर 4-6 माॅडल फाॅर्म विकसित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने किसानों को तकनीक उपलब्ध कराने के साथ समुचित ट्रेनिंग भी सुनिश्चित करने को कहा। राज्य के कुछ क्षेत्रों में आॅर्गेनिक खेती का प्रयास किया जा रहा है, उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ को मंडुए की जैविक खेती के लिए चयनित किया है। उन्होंनेे परम्परागत खेती में सुधार के लिए रिसर्च पर भी बल दिया।
कृषि मंत्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने कहा कि भरसार विश्वविद्यालय राज्य सरकार के कृषि विकास के संकल्प को अमलीजामा पहनाने का सफल प्रयास कर रहा है। रानीचैरी महाविद्यालय भी इस दिशा मे कार्यरत है। डाॅ. रावत ने आशा व्यक्त कि अनाज के क्षेत्र में जो मुकाम पन्तनगर विश्वविद्यालय ने हासिल किया है वहीं मुकाम फलो, फूलों एवं सब्जी के क्षेत्र मे भरसार विश्वविद्यालय करेगा। उन्होने उतराखण्ड की जलवायु को फूलों के उत्पादन के अनुकूल बताते हुए आशा व्यक्त कि की भरसार विश्वविद्यालय के अन्र्तगत शोध केन्द्र ऐसी प्रजातियां विकसित करेगा जिससे किसानों की आय बढ़े।
उन्होने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि भरसार विश्वविद्यालय में फूड प्रोसेसिंग, इको टूरिज्म, पर्वतीय कृषि जैसे विषय प्रारम्भ किये गये है। भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मैथ्यू प्रसाद ने बताया कि विश्वविद्यालय में तीन साल के अल्प समय मे दस परिसर स्थापित किये गये है जबकि 13 एकेडमिक प्रौग्राम संचालित किये जा रहे है इसके साथ ही दो सेन्टर आॅफ एक्सीलैंस स्थापित किए गये है। इस अवसर स्थानीय विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, पदमश्री एवं पर्यावरणविद डा0 अनिल जोशी, डा. बीपी उनियाल सहित कृषि वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएं व स्थानीय किसान मौजूद थे।

Follow us: Uttarakhand Panorama@Facebook and UKPANORAMA@Twitter

0 Comments

No Comments Yet!

You can be first to comment this post!

Leave a Reply

three × 5 =