मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी सरकार के भविष्य का रोडमैप दिया CM Rawat underlines his priorities

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी सरकार के भविष्य का रोडमैप दिया CM Rawat underlines his priorities
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने परेड़ ग्राउण्ड में आयोजित मुख्य समारोह में ध्वाजारोहण किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित भी किया

कार्यक्रम में विभिन्न देशभक्ति गीतों की आकर्षक प्रस्तुतियां देने पर मुख्यमंत्री ने सेना के बैण्ड को सीएम कोष से 25 हजार रूपये देने की घोषणा की। सीएम ने कांवड़ मेला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए हरिद्वार की एसएसपी स्वीटी अग्रवाल, एसडीआरएफ में योगदान के लिए सेनानायक पी.रेणुका देवी व सीपीयू की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए एसपी निवेदिता कुमार कुकरेती को विशिष्ट सेवा के लिए सीएम सराहनीय पदक से सम्मानित किया। इससे पूर्व मुख्यमंत्री श्री रावत ने सीएम आवास, बीजापुर में भी ध्वाजारोहण किया।


15 अगस्त, 2015 मुख्यमंत्री का भाषण

परम आदरणीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके आश्रित, हमारे गौरव वीर सैनिक, माताओं बहनों एवं भाईयों, स्वतंत्रता दिवस के महान अवसर पर, मैं आपको हार्दिक बधाई देता हूँ। प्रदेशवासियों की ओर से, राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ। यह राज्य अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के दीर्घ जीवन की कामना करता है। गर्वोन्नत उत्तराखण्ड, देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में, अपने वीर पुत्रों एवं पुत्रियों के महान योगदान को श्रद्धानत् होकर प्रणाम करता है। सीमा सुरक्षा व राष्ट्र की अखण्डता की रक्षा के लिए, प्राण न्योछावर करने वाले, अपने वीर सैनिकों को भी हम नमन् करते हैं। यह अवसर राज्य आन्दोलन के, अमर शहीदों को भी याद करने का है, उन्हें राज्य का शत्-शत् नमन्।

इसी दिन पिछले वर्ष, जब मैं, आपके सम्मुख खड़ा हुआ था, भीषण आपदा से त्रस्त राज्य आगे बढ़ने के लिए छटपटा रहा था। आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूँ, उत्तराखण्ड जल आपदा की त्रासदी से उबर कर, दृढ़ता पूर्वक विकास के रास्ते पर कदम आगे बढ़ा रहा है। (मायनस) -6 डीग्री सेंटीग्रेट में भी, श्री केदारनाथ में निरन्तर कार्य करते हुए, हमारे लोगों ने राज्य के आत्म विश्वास को बढ़ाया है। देश-दुनिया और भगवान शिव के भक्तजनों ने, उनके कार्य की प्रशंसा की है। हमारा निश्चय यहां से और मजबूत हुआ है, हम एक उन्नतशील खुशहाल उत्तराखण्ड का निर्माण करेंगे। पुर्नवास और पुर्ननिर्माण की प्रक्रिया अभी चल रही हैं, बहुत कुछ अभी किया जाना बाकी है। मुझे विश्वास है इस संदर्भ में हमें, केन्द्र सरकार से उदार आर्थिक सहायता मिलेगी। इस समय तक लगभग 7 लाख तीर्थ यात्री,  इन तीर्थ स्थलों में आ चुके हैं। मुझे भरोसा है, इस वर्ष 11 लाख से अधिक तीर्थ यात्री, इन धामों की यात्रा पर आयेंगे। कावड़-यात्रा अभी-अभी सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई है। तीन करोड़ से अधिक कावडि़ये उत्तराखण्ड पधारे। बीते वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक, हमारे दूर-दराज के पर्यटन गन्तव्यों तक पहुँचे हैं। उत्तराखण्डवासी एक सुरक्षित उत्तराखण्ड का संदेश, देश व दुनिया को देने में सफल हुए हैं।

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पर्यटन के क्षेत्र में, राज्य अपने संशाधनों के बलबुते पर, नये पर्यटक गन्तव्यों को विकसित कर रहा है। इको-टूरिज्म, ट्रैकिंग, माउन्ट बाईकिंग, पैराग्लाइडिंग और दूर-दराज जौलजीवी, पंचेश्वर, चन्द्रपुरी आदि में भी रिवर राफ्ंिटग के नये गन्तव्य विकसित किये जा रहे हैं। द्यारा बुग्याल के साथ, कई अन्य बुग्याल आने वाले समय में पर्यटकों के गन्तव्य होगें। उत्तराखण्ड बर्ड पैराडाइज के रूप में, अपना स्थान बनाये, इस हेतु हम बर्ड फैस्टेबल्स आयोजित कर चुके हैं।

संस्कृति उद्धभव के साथ-साथ, सांस्कृतिक पर्यटन, हमारा अगला सोपान होगा। नंदा राजजात ने हमें रास्ता दिखया है। आप आने वाले वर्षों में, उत्तराखण्ड के सुस्वाद भोजनों का आनन्द लेते हुए, पर्यटकों को देखेगंे। होम स्टे योजना 50 प्रतिशत महिला संचालित होंगी। इस वर्ष प्रमुख मार्गों पर 15 नये सराय/बाजार विकसित किये जायेंगे। अगले तीन वर्ष में 1 लाख युवाओं को पर्यटन रोजगार से जोड़ने की, एक ठोस कार्य नीति के साथ, उपरोक्त बिन्दुओं पर कार्य किया जा रहा है।

पिछले वर्ष जब मंैने, आपसे यहां से बात की थी, तब हम केवल सड़कों की मरम्मत कर पा रहे थे। इस वर्ष अभी तक हम दो सौ पचास सड़कों पर काम प्रारम्भ कर चुके हैं, या उन्हंे पूरा कर चुके हैं। कुल सात सौ सड़कों पर इस वर्ष के अन्त तक, काम प्रारम्भ हो जायेगा। 873 सड़कें, भारत सरकार की अनुमति के लिए, वन विभाग के सहयोग से आॅनलाईन कर दी गई हैं। इस दिशा में लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, आर0ई0एस0 के साथ-साथ ’मेरा गंाव-मेरी सड़क’ योजना के तहत, ग्राम्य विकास विभाग कार्यरत हैं।  पिछले वर्ष हमने लोक निर्माण विभाग के माध्यम से 16 सौ करोड़ रूपये खर्च किये थे, इस वर्ष 25 सौ करोड़ रूपये खर्च करने का लक्ष्य है। इस वर्ष के अन्त तक, सभी निर्माणाधीन फ्लाईओवर्स पूरे हो जायेंगे। हरिद्वार व देहरादून में   3 आर0ओ0बी0 व राज्य में 3 सुरंगांे पर काम प्रारम्भ हो जायेगा। राज्य का अपना पुल निर्माण निगम व फ्लाईओवर निगम भी अस्तित्व में आ जायेगें। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2013-14 की तुलना में दो गुना अधिक धन व्यय किया है। जिला योजना में 94 प्रतिशत धन व्यय हुआ है। तुलनात्मक रूप में कुल खर्च में, पिछले वित्तीय वर्ष से वर्ष 2014-15 में, 3 हजार तीन सौ बयासी करोड़ रू0 अधिक खर्च हुआ है। वर्ष 2014-15 में 10 हजार सात सौ छयानब्बे करोड़ की स्वीकृतियां जारी हुयी हैं। यह अपने आप में एक रिकार्ड है।

मैं आप सबको बधाई देता हूँ आपका राज्य, इस समय सबसे ज्यादा तेजी से विकसित हो रहे, राज्यों में से एक है। हमारे राज्य का सकल घरेलू उत्पादन, पिछले वर्ष में लगभग 13प्रतिशत की दर से बढ़ा है। कृषि विकास दर जो नकारात्मक हो गयी थी, इस वर्ष में 4.76 घनात्मक हो गयी है। रोजगार सृजन 12 प्रतिशत बढ़ा है। भयंकर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे राज्य के लिए, यह सब बड़ी सफलतायें हंै। पिछले तीन वर्षों में हम प्रति व्यक्ति औसत आय में, लगभग 20 हजार रूपये की बृद्धि करने में सफल हुए हैं। मैंने अभी-अभी 19 विधानसभा क्षेत्रों में अपने द्वारा की गई घोषणाओं का अनुश्रवण किया है। मुझे खुशी है कि मेरे द्वारा की गई घोषणाओं में, 90 प्रतिशत पर काम प्रारम्भ हो चुका है, या पूर्ण हो गई हैं। आपकी सरकार का प्रयास राज्य को एक संतुलित, समभावी और समावेशी विकास की दिशा में, आगे बढ़ाने का है।

हमने मंत्रीमण्डलीय फैसलों के द्वारा, समाज के प्रत्येक वर्ग, और राज्य के प्रत्येक क्षेत्र को लाभांवित किया है। आज राज्य की विकास दर में, उर्धवाकार बृद्धि के साथ-साथ क्षैतिजीय बृद्धि भी हो रही है। हमने इस दौर में पिछले किन्ही पांच वर्षों की तुलना में, अधिक मंत्रीमण्डलीय निर्णय लेकर, विकास को एक मंत्र के रूप में, सभी लोगों तक पहुँचाया है। उत्तराखण्ड आज देश में, सेवानिवृत कर्मचारियों के आलावा, पेशागत आधार पर पेन्शन देने वाला, पहला राज्य है। किसान पेन्शन, पुरोहित पेन्शन, कलाकार पेन्शन, पत्रकार पेन्शन, शिल्पी पेन्शन, निर्माणकर्मी पेन्शन आदि के साथ बाजीगरों एवं जगरियों को पेन्शन योजना में समाहित कर, हमने सभी कर्मकारों-सृजनकारों को, सम्मानित करने का प्रयास किया है। विधवा, वृद्धावस्था एवं विकलांग पेन्शन से आगे बढ़कर, हमने अक्षम व परित्यकत्ता नारी, विक्षिप्त व्यक्ति की पत्नी, बौने व्यक्तियों, और जन्म से विकलांग बच्चों को पोषण भत्ते के दायरे में, लाकर उत्तराखण्ड दया का सागर है, इस नाम को सार्थक किया है। विकलांग व्यक्तियों के लिए, नगर निगम क्षेत्रों में सौ, नगर निकायों में क्रमशः 50, 25 व 10 व्यवसायिक फड़ निर्मित किये जायेंगे।

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मैं बहुत विनम्रता पूर्वक, इस तिरंगे झण्डे के नीचे खडे़ होकर कहना चाहता हूॅ, आज हमारा राज्य, अपने बृद्धजनों व बरिष्ठ नागरिकों को लाभांवित करने के लिए, किसी न किसी योजना के साथ खड़ा है। हमने वरिष्ठ नागरिक परिषद का भी गठन किया है। हम उनके कल्याण के लिए कानून भी बना रहे हैं। मैं आज वरिष्ठ नागरिकों से कहना चाहता हूँ, यह किशोर राज्य नतमस्तक भाव से उनकी सेवा के लिए दृढ़ संकल्प है। ’हमारे बुजुर्ग-हमारे तीर्थ’ योजना बहुत लोकप्रिय सिद्ध हुई है। इस योजना के तहत, हम चार धामों के अतिरिक्त, श्री नानकमत्ता, श्री रीठासाहिब, कलियर शरीफ व सम्मेदशिखर एवं निजामुद्दीन ओलिया की दरगाह की यात्रा को भी सम्मिलित कर चुके हैं। वजन मापन व पोषण कार्यक्रम के तहत, साठ वर्ष से उपर की अपनी माताओं और बहनों को, राज्य सरकार पौष्ठिक अनाज उपलब्ध करवा रही है।

जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में कमी आयी है। गर्भवती बहनों को विशेष पौष्टिक तत्वोंयुक्त अनाज, मडुवा, भट्ट व नमक उपलब्ध करवाया जा रहा है। शिशुओं का निरन्तर परीक्षण कर, कुपोषित बच्चों का दायित्व राज्य अपने उपर ले रहा है। जन्म से ही विकलांग बच्चे की मां को, 5 सौ रूपये प्रतिमाह पोषण भत्ता देने वाला, उत्तराखण्ड पहला राज्य है। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के माध्यम से, हम प्रति परिवार 50 हजार रूपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करवा रहे हैं।  9 नवम्बर, 2015 से इस बीमाकृत राशि को बढ़ाकर, 1.5 (डेढ़) लाख कर दिया जायेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में कई सुधारों के साथ, सरकार सर्जिकल कैम्पस की संख्या ड्योढ़ा, व डेढ़ सौ स्थानों पर स्क्रिनिंग एवं डायग्नोष्टिक कैम्पस लगाने जा रही है।

मेरा वादा है, इस वर्ष सितम्बर तक, प्रत्येक स्तर की शिक्षण संस्था में अध्यापक, प्रशिक्षक व प्रधानाचार्य उपलब्ध करवा दिये जायेंगे। हम इस वित्तीय वर्ष में 30 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां दंेगे। अधीनस्त सेवा चयन आयोग भी इस दिशा में, बड़ी तेजी से अपना काम प्रारम्भ कर रहा है। मुझे खुशी है, हम आरक्षित पदों के बैकलाॅग को, पिछले एक वर्ष में 35 प्रतिशत घटाने में सफल हुए हैं। इस वर्ष भी हमारा यह अभियान जारी रहेगा। उत्तराखण्ड महिला सम्मानित राज्य है। हम शिक्षित आशाओं, आगनबाड़ी कार्यकत्रियों और भोजन माताओं को, नई भर्तियों में 20 प्रतिशत तक अधिमान देंगे। उनके सेवानिवृति काल में लाभ हेतु, अंशदायी बीमा योजना व पृथक-पृथक रिवाल्विंग फण्ड स्थापित किये जा रहेे हैं। पुलिस में अतिरिक्त महिला बटालियनें गठित की जायंेगी। मार्च 2016 तक, 1800 महिला कांस्टेबल, व 300 महिला सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती की जायेंगी। होमगार्ड व पी0आर0डी0 में, अगले तीन वर्षों में, 30 प्रतिशत अतिरिक्त संख्या बढ़ाई जायेगी। यह समस्त भर्तियां महिलाओं की होंगी। कन्या सम्मान को आगे बढ़ाते हुए, हम इस वर्ष कन्या धन योजना में कुल लाभार्थियों की संख्या को दुगुना करेंगे। इसके अन्दर नये वर्गों का समावेश किया जायेगा। महिला राज्य आन्दोलनकारियों के लिए पेन्शन पात्रता की उम्र घटाकर 50 वर्ष की जायद्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों के परिवार की कन्या के विवाह के लिए, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 50 हजार रूपये की सहायता दी जायेगी। वर्ष 2013 के आपदा पीडि़त परिवारों की कन्या के विवाह के लिए भी इतनी ही राशि अनुमन्य होगी।

हम 9 नवम्बर, 2015 से, केन्द्र पोषित सस्ते खाद्यान्न की योजना को लागू करेंगे। शहरी क्षेत्रों में निर्धनों व श्रमिकों की सुविधा के लिए, इन्द्रमां भोजनालय खोलने जा रहे हैं, जिसमें 20 रूपये में भोजन मिलेगा। इसका संचालन देहरादून से प्रारम्भ किया जा रहा है। आप सबकी अनुमति से, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु मैं दो महिला उद्यमिता पार्कांे को स्थापित करने की घोषणा करता हूँ। महिला हाट भी स्थापित किये जायेंगे। महिला स्वयं सहायता समूह बाजार भी स्थापित किये जायेंगें, और इन समूहों को कुल अर्जित लाभ पर, 10 प्रतिशत प्रोत्साहन बोनस दिया जायेगा। महिला उद्यमी को पूंजी निवेश पर, अधिकतम 25 लाख तक सब्सिडी और ब्याज में 6 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जायेगी। हैण्डीक्राफ्ट व हैण्डलूम के 10 महिला कलस्टर विकसित किये जायेंगे। इस योजना का नाम ’’नई दिशा’’ होगा।

नन्दा देवी सेन्टर आॅफ एक्सिलंैन्स फाॅर हैण्डलूम की स्थापना की जायेगी। अगले तीन वर्ष में 20 हजार महिला उद्यमी तैयार किये जायेंगे। महिला उद्यमियों के लाभ के लिए पृथक उद्यमिता पोर्टल तैयार किया जायेगा। पारम्परिक शिल्पों के प्रोत्साहन हेतु, पृथक योजना लागू की गई है। गरूड़ाबांज में, हरिप्रसाद टम्टा परम्परागत शिल्प-उन्नयन संस्थान पर कार्य प्रारम्भ किया जा रहा है। इस वर्ष शिल्प रत्न पुरस्कार भी प्रारम्भ किये जायेंगे। महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता को समर्पित, इस वर्ष में, राज्य की माइक्रो हाईडिल नीति के तहत महिला प्रधान वाले गांवों को, 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी दी जायेगी, तथा महिला किसान साक्षरता स्कूल प्रारम्भ किये जायेंगे। महिला समूहों व फेडरेशन्स के उत्पादित माल को, मण्डी तक पहुंचाने हेतु 25 प्रतिशत तक ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दी जायेगी। जायका प्रोजैक्ट में 60 प्रतिशत भागीदारी, महिला मंगल दलों को दी जायेगी। किसान बही में पुरूष के साथ, महिला किसान का भी नाम दर्ज होगा। कर्जग्रस्त महिला स्वयं सहायता समूह को उबारने, व इन्हें पुर्नगठित करने हेतु, बंैकांे विशेषतः सहकारी बंैकों के साथ मिलकर एक कार्य योजना बनाई जायेगी। महिला डेरी संघों की स्थापना के लिए इस वर्ष विशेष अभियान चलाया जायेगा। ऐसे संघों द्वारा क्रय दूध पर, बोनस राशि चार रू0 से बढ़ाकर पांच रू0 होगी।

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संस्कृति संरक्षण व संबर्धन, राज्य का घोषित लक्ष्य है। कलाकारों के हित संरक्षण हेतु, पांच करोड़ रू0 का कारपस फण्ड, कलाकार दलों को दो लाख रू0 प्रतिदल अनुदान, कलाकार बीमा योजना, पेंशन योजना सहित, कई बोर्ड व परामर्शदायी समितियों का गठन कर, राज्य गीत, राज्य वाद्य, लोक परम्पराओं का अभिलेखीकरण, हरेला, झुमैलो, घी संक्रात सहित सभी लोक त्योहारों, लोक कलाओं व राज्य मेलों का संरक्षण कार्यक्रम, वर्ष 2015-16 के लक्ष्यों में सम्मिलित हैं। राज्य की स्थानीय भाषा-बोलियों, लोकगीतों, लोककलाओं, लोकवाद्यों को कक्षा-9 से 12 तक पाठ्यक्रम में अतिरिक्त विषय के रूप में सम्मिलित किया जायेगा, और इस अतिरिक्त विषय के विद्यार्थी को विशेष छात्रवृत्ति दी जायेगी। इस क्रम को आगे बढ़ाने के लिए, एक राज्य स्तरीय परामर्शदात्री समिति शीघ्र गठित की जायेगी। सांस्कृतिक केन्द्र देहरादून व नाट्य अकादमी अल्मोड़ा का इसी वर्ष शुभारम्भ किया जायेगा, और दो सांस्कृतिक व योग मेले आयोजित किये जायेंगे तथा ऋषिकेश मंे योग कुम्भ-2016 का आयोजन किया जायेगा।

कला संबर्धन में विज्ञान व आई0टी0 का बड़ा योगदान है। इस वर्ष सभी लोगों को आधार कार्ड उपलब्ध करवा दिये जायेंगे। प्रत्येक जिला, तहसील व ब्लाक मुख्यालय में देवभूमि जनसेवा केन्द्र कार्यरत हैं, और नागरिक सेवायें जैसे विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र उपलब्ध कर रहे हैं। वर्ष 2017 तक, सभी टूरिस्ट केन्द्रों व जिला मुख्यालयों में वाई-फाई सुविधा प्रदान कर दी जायेगी। यह सुविधा इस वर्ष हरिद्वार के घाटों से प्रारम्भ की जा रही है। राज्य का डाटा सेंटर 2016 तक तैयार हो जायेगा। समाधान पोर्टल पर अभी तक कुल दर्ज शिकायतों, 6 हजार आठ सौ पैंतीस में से, 5 हजार से अधिक का समुचित समाधान कर दिया गया है। इनमें से 2 सौ का निस्तारण मेरे स्तर पर हुआ है।

वर्ष 2018 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों का स्थानीय शुभारम्भ, इसी वर्ष सितम्बर में, राज्य व्यापी ग्रामीण खेलों से किया जायेगा। इस हेतु दो विशाल स्टेडियम के साथ, 50 छोटे व मध्यम खेल मैदानों पर कार्य प्रारम्भ हो चुका है। पदक विजेताओं के सम्मान के साथ-साथ, सात हजार खिलाडि़यों के लिये विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाये जा रहे हैं। मुनस्यारी में दूसरा पर्वतारोहण संस्थान बनाने हेतु 18 करोड़ रू0 स्वीकृत हो चुका है। राज्य में एक और स्पोर्टस कालेज स्थापित हो रहा है। खेल अवस्थापना सुविधाओं हेतु, 173 करोड़ रू0 स्वीकृत हुआ है।

युवा कल्याण विभाग, युवा लड़के-लड़कियों के, विशेष शारीरिक पुष्ठता प्रशिक्षण हेतु, 100 सेवानिवृत सैन्य अधिकारियों की सेवायें लेगा, ताकि वे हमारे युवाओं को सैन्य व अर्धसैन्य बलों में, भर्ती हेतु प्रारम्भिक प्रशिक्षण दे सकें। आपदा जोखिम न्यूनीकरण का भी एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सैनिक, अर्धसैनिक व पुलिसकर्मी हमारे समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं। राज्य अर्धसैनिक कल्याण परिषद के साथ, परिषद का निदेशालय भी गठित किया जा चुका है। हमने केन्द्र सरकार से, वन रैंक-वन पेंशन योजना अतिशीघ्र लागू करने का आग्रह किया है। पुलिस कर्मियों की कुछ समस्याओं को हल कर दिया गया है, शेष का समाधान किया जा रहा है।

वर्ष 2014 में खोले गये 20 नये महाविद्यालयों सहित, उच्च शिक्षा क्षेत्र में, वर्ष 2016-17 तक सभी महाविद्यालयों में, कम्यूनिकेशन स्किल एवं पर्सनालिटी डैवलेपमेंट योजना लागू की जायेगी। अल्मोड़ा में नया आवासीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। इस वर्ष चार राजीव गांधी अभिनव विद्यालय खोले जा चुके हैं। वर्ष 2016-17 तक सभी विकास खण्डों में ऐसे आवासीय विद्यालय खोल दिये जायेंगे।  स्कूली बच्चों को अंग्रेजी व गणित का ज्ञान देने के लिए एक एन0जी0ओ0 के माध्यम से पायलट प्रोजैक्ट प्रारम्भ कर दिया है। यह उन्नति कार्यक्रम के साथ-साथ संचालित होगा।

कुम्भ मेले के, सफलता पूर्वक आयोजन के लिये राज्य प्रतिबद्ध है। दो सौ करोड़ रू0 की लागत से, स्थायी प्रकृति के निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुके हैं। दिसम्बर तक स्थाई और अस्थाई प्रकृति के, सभी कार्य पूरे कर लिये जायेंगेे। इस कार्य पर 350 करोड़ रूपये खर्च का अनुमान है। राज्य के शहरी क्षेत्रों के सुविधा विस्तार के साथ, अर्धशहरी क्षेत्रों के, सुविधा विस्तार के लिए भी योजना पर कार्य प्रारम्भ हो चुका है। भारत रत्न डाॅ0 अब्दुल कलाम के नाम से अर्धशहरी गांवों में बुनियादी सुविधा विस्तार हेतु यह योजना बनाई जा रही है। राज्य में कुछ नये छोटे बाजार व दो स्मार्ट टाऊन अस्तित्व में आयेंगें, इस हेतु तीन वर्ष की योजना पर कार्य किया जा रहा है। मलीन बस्तियों के सुधार व पुर्नवास के साथ उनके अधिकारों की रक्षा की जायेगी और उन्हें मालिकाना हक दिया जायेगा।


सफाई कर्मियों के महत्वपूर्ण कार्य को देखते हुये, उनके लिए 6 हजार स्थाई पद सृजित किये जा रहे हैं। राज्य में दलितों व अतिपिछड़ों के लिए चार आवासीय योजनायें, प्रारम्भ की जा रही हैं। हमारा लक्ष्य तीन वर्ष के अन्दर सभी भूमिहीनों व आवासहीनों को आवास व भूमि पट्टा उपलब्ध करवाना है। भूमि आवंटन हेतु, नया आबाद ग्रान्ट एक्ट की तर्ज पर, भूमि आवंटन के अधिकार जिलाधिकारियों को दिये जा रहे हैं। इन चारों योजनाओं के तहत, तीन वर्षों में, नब्बे हजार रूपया प्रति आवास की दर से, बीस हजार आवास निर्मित होंगे। ये अवासीय योजनायें, महर्षि बाल्मिकी, महर्षि रैदास, खुशीराम आर्य व जयानंद भारती के नाम संचालित होंगी।

उत्तराखण्ड को गर्व है, उसने पिछले वर्ष, अपने किसानों के गन्ने का, समस्त भुगतान करवाने में सफलता पायी है। इस वर्ष हम अभी तक केवल 54 प्रतिशत भुगतान कर पाये हैं, 27 करोड़ रूपया हम और इस हेतु दे रहे हैं। हम हर हालत में नवम्बर तक इस भुगतान को 75 प्रतिशत पहुँचाना चाहते हैं। आपदा पीडि़त किसानों, को हम कुल मिलाकर, 150 करोड़ रूपया सहायता स्वरूप वितरित कर चुके हैं, या करने जा रहे हैं। हम वर्ष 2015-16-17 में सघन कार्यक्रम चलाकर, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल व देहरादून के सभी किसानों को, सोयल हैल्थ कार्ड प्रदान करेंगे। मडुवा, चैलाई, फापर, गहत, झोंगरा, राजमा, माल्टा व नीबू की पैदावार पर, या तो बोनस दिया जायेगा, या उनका सरकारी खरीद मूल्य निर्धारित कर, सरकारी विपणन संस्थाओं से, उनकी खरीद की जायेगी। कलस्टर बेस खेती को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों के लिये चकबंदी कानून बनाने की प्रक्रिया भी गतिमान है। राज्य का नया भूमि प्रबन्धन भी वर्ष 2017 में प्रारम्भ किया जायेगा।

अभी-अभी एक उप मण्डल, 15 तहसिलों एवं उप तहसिलों का सृजन किया गया है। वर्ग-4 की भूमि के कब्जे को, मालिकाना हक देने का भी निर्णय किया गया है। वर्ष 2015-16 में पटवारियों की भर्ती भी पूर्ण की जायेगी। इसी वर्ष 22 नये थाने, 2 एस0डी0आर0एफ0 की कम्पनियों को स्थापित किया गया है। 41 हजार निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण कर, उन्हें कई योजनाओं के माध्यम से लाभांवित किया गया है। इम्पाॅलिइज इन्सोरेन्स स्कीम के तहत, हरिद्वार व उधमसिंहनगर में 100-100 बैड के, दो नये चिकित्सालय भी स्थापित किये जा रहे हैं।
विद्युतीकरण के क्षेत्र में, वर्ष-2017 तक सभी वसासतों, व घरों तक, बिजली पहँुचा दी जायेगी। हरिद्वार में हरकी पंैड़ी में, समस्त विद्युत लाईनों को अण्डर ग्राउण्ड कर, हरकी पैंड़ी की सुन्दरता को बढ़ाया जायेगा। तकनीकी शिक्षा, व चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में, राज्य इस समय सर्वाधिक धन व्यय कर रहा है। निर्माणाधीन व प्रस्तावित 6 मेडिकल काॅलेजों, 8 नर्सिंग कालेजों व जी0एन0एम0 पर, राज्य इस वर्ष 300 करोड़ रूपये से अधिक व्यय करने जा रहा है।

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राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्ष 19 नये पाॅलिटैक्निक खोले गये हैं। हम  इस वर्ष इस मद में 120 करोड़ रूपये खर्च करने जा रहे हैं। मैं इस अवसर का उपयोग, अपने राज्य के समस्त भाई-बहनों व सम्बन्धित लोगों से, शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के अभ्युदय के लिए, नया आन्दोलन चलाने की अपील के साथ करना चाहूंगा। अब समय आ गया है, जब हमें पूरी शक्ति से, शिक्षा व व्यवसायिक शिक्षा में, भारी गुणात्मक सुधार लाने हेतु जुटें। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हुनुर के माध्यम से अल्पसंख्यक बच्चों को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ रहे हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में मदरसों को भी जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक प्रतिभावान छात्रों को, परीक्षा की तैयारी के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अल्पसंख्यक स्व-रोजगार के लिए अल्पसंख्यक वित्त निगम द्वारा 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।  नये मदरसे, जो एस0पी0क्यू0एम0 और इडमी के तहत नहीं आते हैं, उनकी मद्द के लिए, 5 करोड़ रूपये की राशि रखी गई है।

जल संर्बधन के लिए जल संचय पर बोनस देने की योजना बनाई गई है। वन विभाग द्वारा इस वर्ष 13 सौ जल संरक्षण ढाचों का निर्माण किया जा रहा है, अन्य विभाग भी इस कार्य में जुटे हैं। वन विभाग द्वारा खेती सुरक्षा के तहत 150 किमी0 दीवार का निर्माण, व 531 है0 भूमि में, चारागाह का विकास किया जा रहा है।

मैं हरेला कार्यक्रम के तहत, वृहद वृक्षा रोपण के लिए, अपने राज्य के लोगों व वन, उद्यान विभाग सहित, अन्य विभागों को भी धन्यवाद देना चाहूंगा। जल संरक्षण और हरतिमा संबर्धन की ये योजनाऐं, यथावथ आगे भी चलती रहेंगी। हमारा लक्ष्य फल उत्पादन में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त करना, तथा चारे की कमी को दूर करना है। शिक्षा उन्नयन, खेती-बागवानी संर्बधन, हस्तकला, हस्तशिल्प विकास उत्तराखण्ड के आर्थिक उन्नति के तीन महामंत्र हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हॅू, इन तीन आर्थिक धूरियों के तहत, अन्य योजनाओं को जोड़ते हुए, उत्तराखण्ड अगले चार वर्षों में, पलायन को रोकने में सफल होगा। सात वर्षों में रिवर्स पलायन, अर्थात पलायनित क्षेत्र को, रोजगार अवसर युक्त क्षेत्र में बदलने में भी सफल होगा। यही सपना हमारे बुर्जुगों ने देखा था, इसी सपने के साथ राज्य निर्माण का आन्दोलन परवान चढ़ा। भाईयों हम सब मिलकर इस दिशा में कार्य करें, यही समय की अपेक्षा है। हमारे पास प्रतिभा व सामर्थ की कमी नहीं है, हजारों-लाखों गौरवशाली उत्तराखण्डवासी राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दे रहे हैं। हम उनकी योग्यता व क्षमता को प्रणाम करते हैं। उत्तराखण्ड निर्माण की प्रक्रिया में, उनसे जुड़ने का आह्वाहन करते हैं।

हमें अपने उपलब्ध साधनों, और ऊर्जा का उपयोग अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, तथा रोजगार के सृजन में करना है। हम अधिक से अधिक काम करें, इसके लिए हमें दूसरों की तरफ नहीं देखना है, बल्कि स्वयं उदाहरण बनना है। भावना नत् हरीश रावत अपने राज्यवासियों के साथ-साथ, उन सबको भी प्रणाम करता है, जिन्होंने अपने अद्वितीय कौशल से बड़ी-बड़ी ऊंचाईयों को प्राप्त कर उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ाया है। उत्तराखण्ड राज्य सत्-सत् बार, वीर शहीदों व स्वतंत्रता आन्दोलन के नायकों को नमन् करता है। वे सब हमारे तिरंगे की शान के लिए जिये और बलिदान हुए, और आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण छोड़कर गये हैं। उत्तराखण्ड अपनी राष्ट्र सेवा की, इस पहचान को हमेशा बनाये रखेगा, और राष्ट्र निर्माण हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ अर्पित करेगा।

धन्यवाद!

जै हिन्द। जै हिन्द। जै हिन्द।
जै उत्तराखण्ड।

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