उत्तराखंड के हर्बल स्टेट बनने की प्रबल संभावनाएं: राज्यपाल डॉ के के पॉल Uttarakhand: “Herbal” state in the making

उत्तराखंड के हर्बल स्टेट बनने की प्रबल संभावनाएं: राज्यपाल डॉ के के पॉल  Uttarakhand: “Herbal” state in the making


“औद्यानीकरण के क्षेत्र में जड़ी-बूटी तथा सगन्ध पौधों की खेती के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों के काश्तकारों को आजीविका का एक ठोस और सतत आधार मिल सकता है। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक सम्पदा के रूप मे मौजूद औषधीय गुणों से भरपूर बहुमूल्य जड़ी-बूटी तथा सगन्ध पादपों का संरक्षण, संवर्द्धन तथा उस पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिये जाने पर राज्य की तस्वीर बदल सकती है।”



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कृतिक संसाधनों/जैव विविधता से सम्पन्न उत्तराखण्ड़ को ‘हर्बल स्टेट’ के रूप में विकसित किये जाने की अपार सम्भावनायें है। जड़ी-बूटी तथा सगन्ध पौधा आधारित उद्योग को विकसित करके प्रदेश की आर्थिकी में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।’’ — यह बात उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा0 कृष्ण कांत पाल ने आज (4/9/2015) जनपद चमोली के मुख्यालय गोपेश्वर स्थित जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निरीक्षण के दौरान कही।


वैज्ञानिक पद्धति से कृषिकरण की नवीनतम तकनीक अपनाये जाने, काश्तकारों को प्रशिक्षित करने, उत्पादन में वृद्धि तथा उत्पादों के विपणन की व्यवस्थित प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। यह व्यवसाय पहाड़ों पर स्वरोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध कराकर पलायन रोकने में भी सफल हो सकता है।
 

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राज्यपाल ने नई तकनीकी के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए उन्नत तकनीक के व्यावसायिक स्वरूप को काश्तकारों तक पहुॅचाने पर बल दिया। उन्होंने किसानों के लिए, वैज्ञानिकों के योगदान को आवश्यक बताते हुए निर्देश दिये कि उत्पादकता बढाने के लिए किस तरह के उवर्रक प्रयोग किये जाएं इसकी जानकारी भी किसानों को दें, गांवों में यदि कोई काश्तकार जड़ी-बूटी की खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहता है तो उसे प्रोत्साहित करें। व्यावसायीकरण के लिए उत्पादकता तथा उसकी गुणवत्ता को बढ़ाने की जरूरत है इसके लिए वैज्ञानिक क्षेत्र भ्रमण पर जायें और काश्तकारों को विस्तृत जानकारी देकर उनकी मदद करें।

राज्यपाल ने जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के पांचों संकायों तथा नर्सरी का अवलोकन कर उनके संदर्भ में विस्तृत जानकारी भी ली। संस्थान के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने बजट व्यवस्था, नर्सरी संवर्धन, उत्पादन के विपणन, स्टाफ आदि से सम्बन्धित समस्याओं की जानकारी लेते हुए कहा कि संस्थान को उत्पादन बढ़ाने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को विस्तार देने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। संस्थान के सुदृढ़ीकरण के लिए अनेक सुझाव देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि इस निरीक्षण के बाद संस्थान के वर्तमान स्वरूप में अपेक्षित सुधार होगा।

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इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, काश्तकारों ने भी राज्यपाल को संस्थान की समस्याओ से अवगत कराया। राज्यपाल ने संस्थान में औषधीय पौधे का रोपण भी किया। संस्थान के निरीक्षण के बाद राज्यपाल ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर चार धाम यात्रा की व्यवस्थाओं, सीमान्त क्षेत्र में बन रही सड़कों तथा आपदा प्रबंधन विशेषतः भूकम्प से निबटने के संदर्भ में भी जानकारी ली। उन्होंने भूकंप की दृष्टि से जनपद की संवेदनशीलता को देखते हुए भूकंपरोधी भवनों के निर्माण पर जोर दिया और आपदा के दौरान किसी भी दुर्घटना होने पर तत्काल प्राथमिक चिकित्सा मुहैया करवाने के लिए पूर्व से ही तैयारी करने, जनपद के डेंजर जोन चिन्हित करने तथा इसके लिए आप पास के गांवों को मिलाकर एक केंद्र स्थापित करने का सुझाव देते हुए यह भी कहा कि आपदा से निपटने और जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी हो।

इस मौके पर प्रशासन द्वारा राज्यपाल को प्रोजेक्टर के माध्यम से आपदा प्रबंधन की जानकारी दी गई। राज्यपाल के भ्रमण/बैठक के दौरान राज्यपाल के सचिव अरूण ढौडियाल, ए.डी.सी डा0 वाई.एस.रावत, जिलाधिकारी अशोक कुमार, एसपी सुनील कुमार मीणा, संस्थान के निदेशक डा बीके नेगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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