उत्तराखंड के लोगों को नेपाली मोबाइल टावर्स का सहारा !!! People in border areas forced to use signals from Nepalese mobile towers

उत्तराखंड के लोगों को नेपाली मोबाइल टावर्स का सहारा !!! People in border areas forced to use signals from Nepalese mobile towers


बीएसएनएल (BSNL) की नाकामियों से उत्तराखंड के निवासी परेशान

अब जा कर जागी केंद्र सरकार, लगेंगे भरत-नेपाल सीमा में नए मोबाइल टावर्स


हने को भारत में संचार क्रांति का दौर है, पर ऐसी क्रांति का क्या फायदा जहाँ लोगों को अपने मोबाइल से बात करने के लिए पडोसी देश के टेलीकॉम नेटवर्क का इस्तेमाल करना पद रहा है । जी हाँ ऐसा ही कुछ हो रहा है उत्तराखंड के कुछ इलाकों से जो नेपाल की सीमा से सटे हैं । इस बात को दिल्ली में बैठे दूरसंचार विभाग ले आला अधिकारी भी मानते हैं ।


उत्तराखंड के धारचूला और  टनकपुर क्षेत्र के ऐसे कुछ इलाके हैं जहाँ मोबाइल सिग्नल्स की बड़ी समस्या है जिसकी तरफ न तो भारत संचार निगम का और न ही प्राइवेट टेलीकॉम कम्पनीज का ध्यान गया है क्योंकि उन्हें लगता है वहां क्यों पैसा लगाएं जहाँ से कोई मुनाफा नहीं होता । करीब दो दर्जन गाँव ऐसी होंगे जहाँ नेपाल की कंपनियों का नेटवर्क पकड़ता है और ये समस्या काफी समय से है । स्थानीय निवासियों द्वारा बार बार शिकायत करने के बाद भी बीएसएनएल के अधिकारी नहीं चेते, यहाँ तक की ये सवाल संसद में भी उठाया गया ।


पर काफी जद्दो-जहद के बाद अब सरकार की नींद टूटी है । उसने माना है की ऐसी समस्या है जिसके लिए भारत-नेपाल सीमा में बीएसएनएल को नए मोबाइल टावर्स लगाने को कहा गया है । “गृह और दूरसंचार मंत्रालय मिल कर एक प्लान बना रहे हैं जिसमे भारत-नेपाल सीमा में टेलीकॉम नेटवर्क को मजबूत किया जायेगा । यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है । इसमें उत्तराखंड में लगने वाली सीमा पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। इसके लिए कैबिनेट की सिक्योरिटी समिति को जल्दी ही एक प्रस्ताव भेजा जायेगा जिसमे नेपाल सीमा में नए टावर्स लगाने के साथ साथ मोबाइल सिग्नल जम्मेर्स भी लगाये जायेंगे जिससे नेपाल की टेलीकॉम कंपनियों के मोबाइल सिग्नल्स को ब्लॉक किया जा सके,” एक वरिष्ठ टेलीकॉम अधिकारी ने उत्तराखंड पैनोरमा को बताया ।


bsnl
भारत-नेपाल सीमा के मुख्य इलाके जहाँ मोबाइल सिग्नल्स की समस्या है उनके शामिल हैं धारचूला, गूंजी, कालापानी, कुटी, नवींढांग और बुधि ।  इसी प्रकार टनकपुर और बनबसा इलाके के नेपाल सीमा से सटे कुछ गावों में भी ये समस्या है जहाँ के निवासियों की नेपाल की दूरसंचार कंपनियों के मोबाइल सिग्नल्स पर निर्भर रहना पड़ता है ।  सबसे हैरानी की बात तो यह है की भारत के सुरक्षा बल जैसे  सशस्त्र सीमा बल और सीमा सुरक्षा बल के जवान भी नेपाली मोबाइल कंपनियों के मोबाइल सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय गृह मंत्रालय इसे आतंरिक सुरक्षा में एक भारी चूक मानता है और इसके लिए उसने दूरसंचार मंत्रालय से तुरंत सीमा में नए मोबाइल टावर्स लगाने के लिए एक पत्र्र भी लिखा है ।


उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा में मोबाइल नेटवर्क की इस समस्या पर प्रकाश डालते हुए पिथौरागढ़ के उद्योगपति हरीश जोशी कहते हैं — “मुझे कारोबार के सिलसिले में धारचूला, टनकपुर और उसके आस पास के इलाकों में जाना पड़ता है । जैसे ही में नेपाल सीमा के पास होता हूँ मेरे मोबाइल से बसनल के सिग्नल्स गायब हो जाते हैं और नेपाली कंपनियों के सिग्नल्स आने लगते हैं । मोबाइल फ़ोन अपने आप ही इंटरनेशनल रोमिंग में हो जाता है । स्थानीय निवासी इससे बहुत परेशान हैं क्योंकि उन्हें इंटरनेशनल रोमिंग के चार्जेज देने पड़ते हैं । सोचिये जहाँ विश्व में भारत मोबाइल उपभोक्ता में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है वहां इस तरह की मोबाइल की समस्या वह भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बीएसएनएल की पोल खोलता है ।  अब लगता है सरकार जाएगी है तो शायद इस समश्या से जल्दी निदान मिले ।”


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