पहाड़ों में ग्रामीण सड़कों के लिए उत्तराखंड ने केंद्र से माँगा और धन Uttarakhand wants grant for roads under PMGSY to be increased to Rs.550 crore

पहाड़ों में ग्रामीण सड़कों के लिए उत्तराखंड ने केंद्र से माँगा और धन Uttarakhand wants grant for roads under PMGSY to be increased to Rs.550 crore

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सम्पर्क मार्गों से वंचित रह गई आबादियों को सड़कों से जोडने के लिए वार्षिक आवंटन की राशि को 288 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 550 करोड़ रूपए करने तथा आपदा प्रभावित क्षेत्रों सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत 60.61 करोड़ रूपए धनराशि जल्द अवमुक्त करने की मांग की…


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ख्यमंत्री हरीश रावत ने बुद्धवार को दिल्ली में केन्द्रीय ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, पेयजल व स्वच्छता मंत्री चैधरी बिरेंद्र सिंह से भेंट कर उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया। श्री रावत ने कहा कि उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से अपेक्षा की है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सम्पर्क मार्गों से वंचित रह गई आबादियों को सड़कों से जोडने के लिए नए प्रोजेक्टों को मंजूरी देने के साथ ही इसमें राज्य के लिए वार्षिक आवंटन की राशि को 288 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 550 करोड़ रूपए किया जाए। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पीएमजीएसवाई की सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत 60.61 करोड़ रूपए धनराशि जल्द अवमुक्त की जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक भारत सरकार 2010.24 करोड़ रूपए धनराशि के 1125 प्रोजेक्टों को मंजूरी दे चुकी है। 31 मार्च 2015 तक 623 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं जबकि 493 कार्यों पर काम चल रहा है। इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण होने की निर्धारित अवधि को या तो पार कर चुके हैं या उसके नजदीक ही हैं। श्री रावत ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि भारत सरकार से अपर्याप्त धन आवंटन के कारण इन प्रोजेक्टों में देरी हो रही है। इसलिए इन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक धनराशि 1118.64 करोड़ रूपए प्राथमिकता के साथ आवंटित की जाए।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया है कि हरिद्वार में जनवरी से अप्रैल 2016 तक होने जा रहे अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की एकमुश्त केंद्रीय सहायता दी जाए। राज्य स्तर से 5 हेक्टेयर तक के वन भूमि हस्तांतरण अधिकार की बढ़ाई गई अवधि को एक वर्ष की बजाय दो वर्ष किया जाए। चैदहवें वित आयोग की सिफारिशों से पूर्व उत्तराखण्ड को केंद्र से मिल रही सहायता को यथावत बरकरार रखा जाए।


उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि वर्ष 2016 में जनवरी से अप्रैल तक हरिद्वार में अर्धकुम्भ का आयोजन किया जाना है जिसमें 7 से 8 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है। राज्य सरकार सुरक्षित व सफल अर्धकुम्भ के आयोजन के लिए तत्पर है। अर्धकुम्भ के तहत इस बार स्थाई प्रकृति का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। अर्धकुम्भ की 500 करोड़ की योजना में से 325 करोड़ का कार्य स्थाई प्रकृति का है। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 321 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति दी है। इनमें से अनेक कार्य पूर्ण होने वाले हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री व नीति आयोग से अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की सहायता दिए जाने का पूर्व में अनुरोध किया गया है। नीति आयोग द्वारा मार्च 2015 में उत्तराखण्ड को अर्धकुम्भ के लिए 166.67 करोड़ रूपए की सहायता दिए जाने की अनुशंसा भी की है। परंतु अभी तक यह राशि भी राज्य को नहीं मिली है। विषय की महत्ता व राज्य के सीमित संसाधनो को देखते हुए  अर्धकुम्भ के लिए 500 करोड़ रूपए की सहायता राज्य को यथाशीघ्र दी जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि 2018 में राष्ट्रीय खेलों के लिये हमारी तैयारी जारी है। देहरादून का स्टेडियम 2016 में बनकर तैयार हो जायेगा। 2018 के राष्ट्रीय  खेलों से पहले हम इसे लांच करेंगे। हल्द्वानी का स्टेडियम भी शीघ्र तैयार हो जायेगा। हरिद्वार में लगभग 650 करोड़ रूपये लागत से भल्ला काॅलेज के पास स्टेडियम का लोकार्पण बुद्धवार को उनके द्वारा किया गया है। 2016 में इन स्थलों पर अन्तर्राष्ट्रीय रेसलिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक हुनर परिषद अल्पसंख्यकों की बेरोजगारी दूर करने तथा मदरसों के साथ समन्वय बनाने के साथ ही अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम से योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी।


उन्होंने कहा कि एपण को बढ़ावा देने के लिये एपण प्रोत्साहन परिषद का भी गठन किया जायेगा। राज्य के व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिये भी प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाएं पर्यावरण को नुकसान नही पहुंचाती। इसमें समस्या केवल पुनर्वास की है, जल संग्रहण पर्यावरण विनाशक नहीं हो सकता। नदी की धारा का केवल 60 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें रोका जाता है। जल विद्युत परियोजनाओं के बाधित होने से राज्य का नुकसान हो रहा है। इस सम्बंध में राज्य ने अपनी बात रखी है। हम वृक्षारोपण व वनों की रक्षा करने वाले राज्य है। हमने वनावरण बढ़ाया है। वृक्ष लगाने के लिये हम बोनस दे रहे है।


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