जिम कॉर्बेट हमें माफ़ करना !!! Sorry Jim Corbett !!!

जिम कॉर्बेट हमें माफ़ करना !!!  Sorry Jim Corbett !!!


जिम कॉर्बेट ने अपनी जिंदगी का अधिकांश समय नैनीताल जिले के उन स्थानों में गुज़ारा जहां आज उनके नाम से नेशनल पार्क है. वह बँगला भी है कालाढूंगी में जहाँ वो रहा करते थे. इस बंगले में उनकी याद में बने म्यूजियम की बदहाल स्थिति को बयान कर रहे हैं संदीप जोशी

 

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म कॉर्बेट एक ऐसा नाम है जिसको किसी परिचय की जरुरत नहीं. इस पर्यावरणविद, प्रकृति प्रेमी व विश्वविख्यात शिकारी के नाम पर बने नेशनल पार्क को देखने हर साल लाखों लोग उत्तराखंड आते हैं, पर कुछ ही लोग ऐसे हैं तो जिम कॉर्बेट द्वारा अपने पीछे छोड़ी गयी विरासत के दर्शन कर पाते हैं.

जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ उनके बंगले, उनकी बन्दूक और उनके द्वारा बनायी गयी चौपाल की जो की आज बहुत ही बुरी हालत में हैं. अगर हम जल्दी नहीं चेते तो ये धरोहर जल्द ही विलुप्त हो जाएँगी, ठीक उसी तरह जिस तरह हमने अपने चीतों और तेंदुओं का हाल किया है. आइये पहले हम बात करते हैं जिम कॉर्बेट म्यूजियम की, उनकी ऐतिहासिक बन्दूक की बात करेंगे अगले अंक में.

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Jim Corbett’s Bungalow in Kaladungi (Nainital district) which now houses Jim Corbett Museum

 

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Jim Corbett’s bust and a plaque that narrates the story of Choti Haldwani, a village which he adopted near Kaladungi

 

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The story of Jim Corbett’s Bungalow-turned-Museum

 

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One of the galleries inside the museum


जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क मुख्यतः उत्तराखंड के नैनीताल जिले में फैला हुआ है. इसके बाहरी क्षेत्र में एक छोटा सा क़स्बा है कालाढूंगी — जहाँ पड़ता है जिम कॉर्बेट का गाँव — छोटी हल्द्वानी. इस गाँव के बाहर जिम कॉर्बेट ने सर्दियों में रहने के लिए एक आयरिश डिज़ाइन का बंगला बनाया. इस बंगले से जिम कॉर्बेट ने कई सारे आदमखोर शेर व तेंदुए के शिकार की तैयारी की थी. जब 1947 में जिम कॉर्बेट भारत छोड़ कर केन्या गए, तो वह अपने नैनीताल के मित्र को इसे सौंप गए ताकि इसकी देखभाल हो सके.

बाद में सरकार ने इसे खरीद कर एक म्यूजियम बना दिया जिसमें  रखी हैं जिम कॉर्बेट की दुर्लभ तस्वीरें, पेंटिंग्स और उनके द्वारा शिकार व कैंपिंग में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें जैसे लैम्प्स, विभिन्न प्रकार के औजार व कैंपिंग के फर्नीचर जैसे चारपाई, टेबल, चेयर, चाय की केतली और कप्स. जिम कॉर्बेट म्यूजियम में इस विश्वविख्यात शिकारी की बड़ी सारी पेंटिंग्स के अलावा उनके हस्तलिखित पत्र भी रखे हैं.

विडम्बना यह है कि एक-दो फारेस्ट विभाग के अप्रशिक्षित कर्मचारियों के अलावा इस बहुमूल्य धरोहर कि देखभाल करने वाला कोई भी नहीं है. कोई भी आकर यहाँ रखे सामान को हाथ लगा लेता है, जिससे इसके खराब होने का खतरा बना रहता है. दो भाग में बंटे इस म्यूजियम की तरफ सरकारी अमले का बिल्कुल ध्यान नहीं है. ऐसा लगता है जैसे बरसों से यहाँ रंग-रोगन नहीं हुआ है, न ही यहाँ कभी जिम कॉर्बेट की चीज़ों का सहेज कर रखने कि कोशिश हुई है. इस महान शिकारी के सामान को बस यूँ ही बेतरतीब तरीके से रख दिया गया है बिना किसी सोच विचार के, बिना किसी एक्सपर्ट से सलाह ले कर.

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A handwritten note by Jim Corbett that reads — Don’t be too critical. A jungle can only tell his stories in jungle language

 

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An interesting letter written by Jim Corbett from Kenya to Chiranji Lal Shah of Nainital whom he gave his bungalow before leaving India in 1947

 

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One more letter from Jim Corbett

 

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In the honour of Jim Corbett

 

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One of the giant kills of Jim Corbett


“बहुत ही दुःख का विषय है कि जिस महान आदमी ने विश्व को ऐसी धरोहर दी, हम भारतीयों को जंगल और उसके जानवरों की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया, आज हम उसी शिकारी के द्वारा छोड़ी गयी धरोहर को अनदेखा कर रहे हैं. जो लोग दूर-दूर से आकर इस म्यूजियम को देखते हैं, खासकर विदेशी पर्यटक, उन्हें बड़ी मायूसी होती है. उनका बस इतना कहना होता है कि काश ये भी एक विश्व प्रसिद्ध म्यूजियम होता जो की एक बढ़िया एक्सपर्ट मैनेज करता, जहाँ बढ़िया गाइड्स होते, बढ़िया ऑडियो-वीडियो हॉल होता जहाँ जिम कॉर्बेट की जीवनी पर एक मूवी होती, कॉर्बेट नेशनल पार्क के बारे में जानकारियां होतीं. पर यहाँ ऐसा कुछ नहीं है…बस कॉर्बेट की कुछ चीज़ों को एकसाथ रख दिया है,” यह कहना है एडवेंचर टूरिज्म एक्सपर्ट हरीश सिंह बिष्ट का.

हरीश सिंह बिष्ट हर साल कुमाऊं रीजन में पर्यटकों के लिए नेचर टूर्स प्लान करते हैं जहाँ वह विशेष ध्यान देते हैं की कॉर्बेट नेशनल पार्क आने वाले उनके म्यूजियम में जरूर जाएँ. “काश हमारी सरकार जागती और कॉर्बेट की याद में इस म्यूजियम को एक ऐसे मुकाम पर पहुंचाती जिस पर हर भारतीय को गर्व होता. अभी भी समय है अगर हम कालाढूंगी में कॉर्बेट के इस घर को इतिहास के पन्नो के गायब होने से बचा लें,” यह गुहार है एक प्रकृति प्रेमी की सरकार से.

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Furniture that was used in the Corbett household

 

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On display at the museum are articles used by Jim Corbett

 

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A chair hand-woven by Jim Corbett

 

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During the Corbett-era palanquins were used to carry people in remote areas

 

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Articles used by Jim Corbett

 

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Lamps used by Jim Corbett at jungle camps and his bungalow


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