नैनिसार की आग कहीं पूरे प्रदेश में न फैल जाये? CM Harish Rawat needs to douse the fire

नैनिसार की आग कहीं पूरे प्रदेश में न फैल जाये? CM Harish Rawat needs to douse the fire

नैनिसार प्रकरण में उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी व साथियों पर 23 जनवरी को नैनीसार (अल्मोड़ा ) में हुए हमले हुए हमले को लेकर प्रदेश की राजनीती गरमा गयी है हालात ये हैं की कांग्रेस के खिलाफ सारी पार्टियां एकजुट हो गयी हैं प्रदेश में चुनाव अब एक वर्ष से काम समय में होने वाले हैं और ऐसे समय में यह मुद्दा कहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत की गले की हड्डी न बन कर रह जाये यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नैनिसार मुख्यमंत्री के गृह जिले से सम्बंधित है, इसलिए उनके सारे विरोधी इस मुद्दे को भुनाने चाहेंगे अगर श्री रावत ने समय रहते इस मुद्दे को नहीं सुलझाया तो हो सकता है की उनको इसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़े श्री तिवारी के साथ हुई मारपीट की सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया आई है जहाँ एक तरफ अल्मोड़ा, रानीखेत सहित अनेक स्थानों पर इस प्रकरण के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं, सोशल मीडिया में भी कांग्रेस सरकार की काफी आलोचना हुई है…

 

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पी सी तिवारी रानीखेत अस्पताल में


रोप यह हैं की जिंदल समूह के नैनिसार में बन रही आवासीय विद्यालय परियोजना में तैनात कर्मचारियों ने श्री तिवारी और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को पकड़-पकड़ कर गाड़ी में डालना शुरू कर दिया। जब हालात उग्र हो गए तो पुलिस प्रशासन ने दो हरियाणा नम्बर की गाडि़यों तथा एक अल्मोड़ा नम्बर की फाॅरचुनर कार में सभी जिंदल के लोगों केा बैठाकर सुरक्षा प्रदान करके वहाॅ से निकलने में सहायता करी और उनके आगे पीछे सुरक्षा दी। दूसरी तरफ अपने नेता के साथ हुए जानलेवा हमले के दोषियों को पकड़ने की माॅग कर रहे ग्रामीणों को जेल भेज दिया।

इसी बीच पी सी तिवारी एक पत्रकार साथी की कार से आंदोलन स्थल की तरफ आ रहे थे तो उन्हें कार से उतार कर पुलिस ने उन्हें जबरन जीप में डाल लिया। उनके साथ रेखा धस्माना, को भी बिना महिला पुलिस की सहायता के जीप के पिछले सीट पर धकेल दिया। वहीं एक वरिष्ठ नागरिक अवकाश प्राप्त शिक्षिका आंनदी वर्मा जो पी.सी.तिवारी को चोट आने की खबर से अल्मोड़ा से उन्हें देखने गई थी, उन्हें भी पुलिस ने पकड़कर जीप में धकेल दिया। सड़क पर उनका चवनप्राश का डिब्बा, दवायें व अन्य सामान बिखर गया और फिर पुलिस से मिन्नतें करने के बाद किसी तरह वह अपनी दवाओं को ले पाई।

सभी ग्रामीणों सहित पी.सी.तिवारी को रात 3 बजे तक अल्मोड़ा थाने में रखा गया और जेल नियमों के विरूद्व रात में जेल खुलवाकर 3 से 3:30 बजे रात में उन्हें जेल भेज दिया गया। वहाॅ पी.सी. तिवारी जी का स्वास्थ्य खराब देखकर आज दिन में उन्हें अल्मोड़ा बेस चिकित्सालय में आई.सी.यू में भर्ती किया गया है।

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नैनिसार के पास चक्का जाम करतीं महिलाएं


आंदोलनकारी संगठनों ने की तिवारी व साथियों के साथ मारपीट व गिरफ्तारी की कड़ी भत्र्सना


त्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा व उत्तराखण्ड लोक वाहिनी सहित तमाम आंदोलनकारी संगठनों ने उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी व साथियों पर 23 जनवरी को नैनीसार में हुए हमले की कड़ी भत्र्सना करते हुए श्री तिवारी व साथियों पर हमला करने वालों को तुरंत गिरफ्तार करने व परिवर्तन पार्टी के कार्यकत्र्ताओं को तुरंत रिहा करने की पुरजोर मांग की। इस प्रकरण की कड़ी भत्र्सना करते हुए उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने इस प्रकरण के दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने व न्याय की गुहार लगाने वाले पीसी तिवारी सहित सभी गिरफ्तार साथियों को छोड़ने की मांग की।

इस प्रकरण की कड़ी भत्र्सना करते हुए उत्तराखण्ड लोक वाहिनी के अध्यक्ष डा शमशेर सिंह बिष्ट, उक्रांद नेता प्रताप शाही, उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी व उपाध्यक्ष सुरेश नौटियाल, उत्तराखण्ड मानवाधिकार समिति व भाजपा नेता एस के शर्मा, समाजसेवी अधिवक्ता चंद्रशेखर करगेती, उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद के पूर्व महासचिव दाताराम चमोली सहित अनैक संगठनों ने इस प्रकरण की कडी भत्र्सना करते हुए सीधी सीधे मुख्यमंत्री हरीश रावत को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। आंदोलनकारी इस बात से हैरान थे कि प्रशासन की शह पर ही नैनीसार में न्यायालय के आदेश को लेकर गये अधिवक्ता पीसी तिवारी व साथियों पर जानलेवा हमला किया गया। इस प्रकरण के दोषियों को गिरफ्तार करने के बजाय न्याय की फरियाद करने वाले पीसी तिवारी व साथियों को ही जेल भेज दिया गया।

इसके विरोध में उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के प्रधान सचिव प्रभात ध्यानी के नेतृत्व में रामनगर में 11 बजे विरोध स्वरूप पुतला दहन किया गया। इस घटना के बारे में बयान करते हुए प्रभात ध्यानी ने कहा कि 23 जनवरी को न्यायालय ने एड़ पीसी तिवारी की पैरवी के वाद निर्माण कार्यों पर आगामी 15 फरवरी तक रोक लगाते हुये ग्रामीणों के पक्ष में स्टे आर्डर दिया । जिसे न्यायालय कर्मचारी द्वारा अधिवक्ता तिवारी तामील कराने नैनीसार गये। गेट पर पीसी तिवारी को देखते ही वहां पहले से ही उपस्थित जिन्दल के वाक्सरों न केवल पीसी तिवारी के साथ मारपीट की अपितु उन्हें जबरन अगुवा कर अपने परिसर में ले गये जहां उनके साथ जमकर मारपीट की गयी । उनके साथ मौजूद न्यायालयकर्मी व रेखा धस्माना द्वारा विरोध करने व चिल्लाने पर जिन्दल के गुण्ड़ों ने रेखा धस्माना के साथ मारपीट की तथा अभ्रदता की तथा उनसे टेबलाइड़ छीन लिया जिन पर उसने वीडियो व फोटोग्राफ लिये थे । बाद में रानीखेत में मेडिकल कराने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें एडमिट होने को कहा।

तिवारी ने कहा कि वे पहले नैनीसार में साथियों से मिलने तथा वहां खड़ी अपनी गाड़ी से रूटीन दवाइयां लेने के बाद अल्मोड़ा में अस्पताल में भर्ती होंगें । जब वे रेखा धस्माना व आनन्दी वर्मा के साथ नैनीसार जा रहे थे तो भारी पुलिस ने उन्हें रोकते हुये हिरासत में ले लिया जहां से उन्हें अल्मोड़ा कोतवाली ले गये । वहीं सुबह 24 जनवरी को शान्ति भंग की आशंका में पीसी तिवारी , रेखा धस्माना, आनन्दी रावत , 8 ग्रामीण सहित 11 लोगों को सुबह अल्मोड़ा जेल भेजा । दूसरी तरफ मारपीट करने वाले गुण्डों पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। इससे लोगों में असंतोष है।

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आंदोलन की तैयारी…


(कुछ पोस्ट्स फेसबुक से हैं)

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