गांव-बैंडुल — जनसँख्या-1; Uttarakhand=Migration from the Hills

गांव-बैंडुल — जनसँख्या-1; Uttarakhand=Migration from the Hills


पलायन का दर्द बयान करता है पौड़ी से  25 किलोमीटर की दूरी पर बसा बैंडुल गांव जहाँ कभी 70 से 80 परिवार रहते थे। आइये जानते हैं कैसे एक बजुर्ग महिला इस दंश से संघर्ष कर रही है…


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टी-छोटी मानव बस्तियों को गाँव कहते हैं जिनकी जनसंख्या कुछ सौ से लेकर कुछ हजार के बीच होती है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी गांव की जनसख्यां 1 हो सकती है!


जी हां, उत्तराखंड के पौड़ी जिले मे एक ऐसा गांव है जहां की जनसख्यां 1 है । यहां के बैंडुल गांव मे आज केवल विमला देवी नाम की एक बुर्जग महिला रहती है और बाकी पूरा गांव पलायन कर चुका है उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रो मे पलायन की इससे दर्दभरी कहानी शायद नही हो सकती है ।


उत्तराखंड के मण्डल मुख्यायल पौड़ी से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर बसा ये गांव पौड़ी के कोट ब्लाक का बैंडुल गांव है जहां पलायन ने इस कदर अपने पांव पसारे कि कुछ समय पहले जिस गांव में 70 से 80 परिवार रहते थे वहां आज केवल 1 ही बजुर्ग महिला बची है। जिस गांव मे कभी सैकड़ो लोगों की जमात लगती थी उसी गांव मे आज सन्नाटा छा चुका है।


गांव के इस तनहाई भरे माहौल में आज भी अपना जीवन बसर कर रही है तो वो हैं गांव की विमला देवी। आज भी ये आस लगाये हैं कि दिपावली, होली जैसे त्योहारों में ही सही पर कभी तो ये गांव एक बार फिर से चकाचौंध हो जाये। लेकिन यहां की चकाचौंध को पलायन की नजर इस कदर लगी की कोई परिंदा भी यहां पैर नहीं मार रहा।

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इतना ही इस गांव के पडोस में ही बसा एक और गांव भी खाली हो चुका है और यहां भी महज तीन परिवार ही बाकी रह गये हैं। गांव मे कुछ समय पहले फसलों से लहलहाने वाले खेत खलियाना भी अब बंजर हो चुके हैं। साथ ही गांव की देखरेख न होने से कई मकान भी खण्डर में तबदील हो चुके हैं। ये पूरा गांव अब धीमे-धीमे जंगल में तबदील होता जा रहा है और सरकार की पलायन को रोकने की चिंताये सिर्फ पलायन पर गोष्ठी आयोजित कर ही सीमट जा रही है। ऐसे में गांव बचाओ-गांव बसाओं के संयोजक ने भी 15 सालों में उत्तराखण्ड पर राज करने वाली सरकारों को इसका जिम्मेदार ठहराया है।


वहीं बैंडुल गांव में पलायन के चलते पूरा गांव जंगल में तबदील हो जाने के बाद विमला देवी जंगली जानवरों से अपनी हिफाजत को चाहते हुए दिन ढलते ही घर के भीतर दुबक जा रही है साथ ही अब तक किसी के यहां न पहुंच पाने से विमला देवी का यहां रहने का हौसला भी धीमे-धीमे टूटने लगा है और विमला देवी खुद को विस्थापित करने की गुहार लगा रही है।


पौड़ी का ये एक मात्र ऐसा गांव नहीं है जो खाली हो चुका है बल्की सुमाडी भी ऐसा ही जीता जागता उद्धाहण है जहां पहले 800 परिवार से गुलजार रहने वाला ये गांव अब 60 परिवारों में आकर सीमट चुका है, तो वहीं ऐकेश्वर और कल्जीखाल ब्लाक सहित चैबट्टाखाल ब्लाक के कई गांव भी खाली होते जा रहे हैं। पलायन को रोकने में जल्द अगर सरकार ने कोई कडा कदम नहीं उठाया तो वो दिन दूर नहीं जब उत्तराखण्ड खण्ड-खण्ड होता नजर आयेगा।

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पलायन का दर्द बयां करती ये तस्वीर


Post and photos courtesy: JagoUttarakhand via Facebook


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