उत्तराखंड बजट को लेकर हरीश रावत की नरेंद्र मोदी से गुहार CM seeks clearance for Budget expenditure

उत्तराखंड बजट को लेकर हरीश रावत की नरेंद्र मोदी से गुहार  CM seeks clearance for Budget expenditure

भाजपा द्वारा कांग्रेस को उत्तराखंड की सत्ता से हटाने की कोशिशों के बावजूद हरीश रावत ने दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की  इस प्रकरण के बाद उत्तराखंड एवं भाजपा-शाषित केंद्र में चली आ रही खींचतान और बड़ गयी है। इसका एक उदहारण है उत्तराखंड के बजट को लेकर चल रही उहापोह की स्थिति। अब हरीश रावत ने फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिख कर बजट के पैसों कप ख़र्च करने के लिए अनुमति मांगी है…


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ख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रेषित पत्र के माध्यम से उत्तराखण्ड के शेष बजट पर शीघ्र कार्यवाही का अनुरोध किया है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री श्री रावत ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया है कि उत्तराखण्ड विधानसभा में दिनांक 18 मार्च, 2016 को रू. 40422.20 करोड़ का आय-व्ययक तथा विनियोग विधेयक पारित हुआ जिसे श्री राज्यपाल ने राष्ट्रपति जी को भेज दिया। इस मध्य दिनांक 28 मई, 2016 को भारत के राष्ट्रपति का अनुमोदन प्राप्त होने के अनुक्रम में उत्तराखण्ड विनियोग(लेखानुदान) अधिनियम, 2016 प्र्रख्यापित किया गया। इस अधिनियम के अन्तर्गत मात्र रू. 13642.4385 करोड़ के आय व्ययक को पारित किया गया एवं इसकी समय सीमा 31 जुलाई, 2016 तक ही है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने प्रधानमंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि उत्तराखण्ड राज्य को शेष रू. 26779.7615 करोड़ के बजट का समय पर उपयोग करने का अधिकार मिल सके तथा उत्तराखण्ड के विकास कार्य निर्बाध रूप से चलते रहें, इस क्रम में उनके द्वारा 27 मई, 2016 को प्रेषित पत्र द्वारा श्री राज्यपाल से निवेदन किया तथा इस पत्र की एक प्रति गृह मंत्रालय, भारत सरकार को भी प्रेषित की गई है। किन्तु दिनांक 15 जून, 2016 तक इस सम्बन्ध में न तो श्री राज्यपाल के निर्देश प्राप्त हुए और न ही गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कोई मार्गदर्शन दिया गया है। ऐसी परिस्थिति में उनके पास दो विकल्प है, मा. न्यायालय द्वारा प्रकरण में विनिश्चय प्राप्त करना अथवा उत्तरखण्ड की विधानसभा में पुनः इस विषय को मतदान हेतु प्रस्तुत करना। उन्होंने कहा कि इन दोनों विकल्पों में यह संशय है कि भारत के संविधान मंे प्रदत्त केन्द्र एवं राज्यों के सम्बंध तथा भारत के संघीय ढ़ांचे की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह उपस्थित हो सकते है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि आप स्वयं राज्यों के अधिकारों तथा संघीय ढांचे की मर्यादाओं के समर्थक तथा पोषक रहे है। गणतन्त्र में ऐसे विवादों को आप उत्पन्न नहीं होने देना चाहते है। यदि इस प्रकार के विवाद कहीं उत्पन्न हो रहे है तो आप निश्चित ही उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन देकर सुलझाना चाहेंगे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि संविधान के अनुच्छेद 200/207 के अंतर्गत दिनांक 18 मार्च, 2016 को उत्तराखण्ड विधान सभा में पारित आय-व्ययक तथा विनियोग विधेयक को सक्षम स्तर से ससमय अनुमति मिल सके।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भारतीय लोकतन्त्र में अनेक ऐसे दौर आये है जब राजनीति तथा शासन की दिशायें आरोप-प्रत्यारोप के भंवर में फंसी है। यह हमारा सौभाग्य है कि भारत का लोकतन्त्र हमेशा ऐसे संक्रमण काल में और अधिक मजबूत होकर सम्मानित हुआ है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार से उत्तराखण्ड भारत के 100वें हिस्से से भी छोटा है। इस छोटे सीमावर्ती पर्वतीय राज्य के प्रमुख सेवक के रूप में उनका दायित्व है कि भारतीय लोकतंत्र के सर्वाेंच्च व्यक्ति से राज्य के हितों की रक्षा के लिये निवेदन कर सकूं।


इससे पहले हरीश रावत प्रधानमंत्री मोदी से आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों को सुरक्षित स्थानों पर पुर्नस्थापित करने के लिए केंद्र सरकार 13 हजार करोड रूपये का पैकेज की मांग कर चुके हैं। हरीश रावत ने कहा नमामी गंगा/नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत उत्तराखण्ड में 12 कस्बों के लिए 707 करोड़ 60 लाख रूपए की विभिन्न डीपीआर को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। सीसीयू द्वारा स्वीकृत विशेष पुननिर्माण पैकेज के तहत सीएसएस-आर के तहत 380 करोड़ 94 लाख रूपए, सीएसएस-एफएमपी के तहत 141 करोड़ 98 लाख रूपये, एसपीए-आर के लिए 400 करोड़ रूपये जल्द से जल्द अवमुक्त किए जाएं। बाह्य सहायतित परियोजनाओं के वित्त पोषण में 90ः10 के अनुपात को बरकरार रखा जाए। पीएमजीएसवाई के तहत 990 करोड़ रूपए की 189 डीपीआर को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की जाए। पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखण्ड के योगदान को देखते हुए राज्य को प्रतिवर्ष 4 हजार करोड़ रूपये की राशि प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को नई दिल्ली साउथ ब्लॉक स्थित पीएमओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर राज्य से विभिन्न मुद्दों पर उनका ध्यान आकृष्ट करते हुए आवश्यक कार्यवाही किए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को श्री केदारनाथ धाम आने के लिए भी आमंत्रित किया।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि जून 2013 में केबिनेट कमेटी ऑन उत्तराखण्ड द्वारा राज्य में विशेष पुनर्निर्माण पैकेज स्वीकृत किया गया था। सीएसएस-आर के तहत सिंचाई विभाग की 54 योजनाओं के लिए 657 करोड़ 79 लाख रूपए स्वीकृत किए गए थे। इसके तहत केंद्र सरकार से अभी भी 380 करोड़ 94 लाख रूपए की राशि अवमुक्त की जानी है।  इसी प्रकार सीएसएस-एफएमपी के तहत सिंचाई विभाग की 17 योजनाओं के लिए 265 करोड 83 लाख रूपये स्वीकृत किये गए थे। परन्तु भारत सरकार द्वारा इसके तहत 141 करोड़ 98 लाख रूपये अवमुक्त किये जाने है। इसी प्रकार सीसीयू द्वारा स्वीकृत पैकेज के तहत वर्ष 2016-17 में एसपीए-आर के लिए 400 करोड़ रूपये अवमुक्त किये जाने है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि वर्ष 1969 में सात आधार पर राज्यों के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा निर्धारित किया गया था। इन्हीं आधार पर वर्ष 2001 में उत्तराखण्ड को भी विशेष श्रेणी का दर्जा देते हुए वाह्य सहायतित परियोजनाओं में केन्द्र से सहायता राशि 90ः10 के अनुपात में मिलती थी। वर्तमान में संज्ञान में आ रहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा इस 90ः10 के अनुपात को परिवर्तित किया जा सकता है। उत्तराखण्ड के सामरिक महत्व और विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ईएपी परियोजनाओं में 90ः10 के अनुपात को बनाये रखा जाए।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि एन.आर.डी.डब्ल्यू.पी. द्वारा राज्य के लिए बजटीय सहायता में 50 प्रतिशत की कमी की गई है। विश्व बैंक से वित्त पोषित स्वजल योजना भी बन्द हो गई है। इसे देखते हुए राज्य में पेयजल के क्षेत्र में केन्द्र द्वारा पर्याप्त सहयोग किए जाने की आवश्यकता है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के तहत 12 कस्बों के लिए 578 करोड़ 83 लाख रूपए की डीपीआर तैयार की गई है जिसमें कि बायोडाइजेस्टर, एसटीपी का प्राविधान किया गया है। इसी प्रकार 57 करोड़ 77 लाख रूपए की डीपीआर मौजूदा 7 एसटीपी को अपग्रेड करने के लिए तैयार की गई है। उक्त डीपीआर को जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक हरिद्वार में एसटीपी के निर्माण के लिए ही 71 करोड़ रूपए की डीपीआर को स्वीकृति तो दी है परंतु इसकी बीडिंग प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के कारण प्रगति नहीं हो पा रही है। 40 एमएलडी की इस एसटीपी की बीडिंग को सम्पन्न करने की भी अनुमति दी जाए।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एनएमसीजी के तहत केंद्र सरकार को भेजी गई विभिन्न प्रोजेक्टों की डीपीआर को शीघ्रताशीघ्र स्वीकृति दी जाए। साथ ही इस तरह के कार्यों को करने में विशेषज्ञता रखने के कारण उक्त प्रोजेक्टों के क्रियान्वयन की जिम्मेवार उत्तराखण्ड पेयजल संसाधन निगम को दी जाए।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड की आर्थिकी में हाईड्रोपॉवर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। केन्द्र सरकार भी ग्रीन एनर्जी को प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुख्यतः 300 मेगावाट के लखवाड़ व 660 मेगावाट के किसाऊ हाईड्रोपॉवर प्रोजेक्ट को स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी घाट के इको सेंसटिव जोन की तर्ज पर ही उत्तराखण्ड के इकोसेंसटिव जोन के 25 मेगावाट के लघु जल विद्युत परियोजनाओं को अनुमति दी जा सकती है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि जीएसआई, वाडिया इंस्टीट्यूट आदि संस्थाओं द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार उत्तराखण्ड में 352 गांव आपदा की दृष्टि से असुरक्षित क्षेत्रों में स्थित है। इन गांवों को सुरक्षित स्थानों पर पुर्नस्थापित करने के लिए लगभग 13 हजार करोड रूपये राशि की आवश्यकता होगी। राज्य के सीमित संसाधनों व विषय की गंभीरता को देखते हुए केन्द्र सरकार से इसमें सहयोग की अपेक्षा है। राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में पहले भी केन्द्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया जा चुका है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हाल ही में एक संसदीय समिति द्वारा उत्तराखण्ड में भूकंप की अधिक संभावना को देखते हुए राज्य के सभी विद्यालयो के भवनों को भूकम्परोधी बनाये जाने की संस्तुती की गई थी। इसके लिए लगभग 1 हजार करोड रूपये के विशेष पैकेज की आवश्यकता होगी। केदारनाथ आपदा के पश्चात् एनडीआरएफ की तर्ज पर एसडीआरएफ का गठन किया गया है। वर्तमान में इसकी तीन कम्पनियां कार्यरत है। एसडीआरएफ के लिए देहरादून के समीप 25 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। एसडीआरएफ के स्थापना संबंधी कार्यों के लिए केन्द्र सरकार से 170 करोड़ रूपये की सहायता की आवश्यकता होगी। मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए उत्तराखण्ड के विभिन्न स्थानों पर डॉप्लर रडार स्थापित किये जाने की आवश्यकता है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने पीएमजीएसवाई के तहत 990 करोड़ रूपए की 189 डीपीआर को औपचारिक स्वीकृति दिए जाने व पीएमजीएसवाई के तहत उत्तराखण्ड को एन्युअल इंडिकेटिव एलोकेशन वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 446 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 600 करोड़ रूपए किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री सड़क परिवन एवं राजमार्ग द्वारा राज्य में अनेक नई परियोजनाओं को स्वीकृति दिए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में कुछ नए राजमार्ग बनाये जाने का प्रस्ताव केन्द्रीय मंत्रालय में विचाराधीन है। मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति दिए जाने का भी अनुरोध किया। इसके साथ ही पंतनगर से दिल्ली के लिए दैनिक हवाई सेवाएं व पंतनगर एयरपोर्ट पर एटीएफ की सुविधा भी प्रारम्भ की जाए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट व पर्यटन ढ़ांचागत विकास के लिए रिजर्व बैंक की गाईडलाईन्स के तहत मास्टर लिस्ट ऑफ इन्फ्रास्ट्रक्चर में रोपवे, केबल कार, फनीक्यूलर, एस्केलेटर, एलीवेटर को भी शामिल किया जा सकता है। देहरादून शहर के लिए मैट्रो रेल नेटवर्क को स्वीकृति दिए जाने की भी आवश्यकता है।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि वर्ल्ड फॉरेस्ट्री कांग्रेस 2009 द्वारा उत्तराखण्ड की इको सेवाओं को मूल्य 32 हजार करोड़ रूपये प्रतिवर्ष आंकलित किया गया था। भारत सरकार की बी.के.चतुर्वेदी समिति द्वारा इको सेवाएं प्रदान करने वाले राज्यों को सकल बजटीय सहायता का 2 प्रतिशत राशि हस्तांतरित करने की संस्तुति की गई थी। पर्यावरण में उत्तराखण्ड के योगदान को देखते हुए राज्य को प्रतिवर्ष 4 हजार करोड़ रूपये की राशि दिए जाने का मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया।


मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि वर्ष 2014-15 व 2015-16 के लिए एस.सी/एस.टी व ओ.बी.सी. छात्रों की पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में केन्द्र सरकार से राज्य को 189 करोड रूपये अवमुक्त किये जाने शेष है। जबकि इस मद में वर्ष 2016-17 के लिए राज्य की अतिरिक्त मांग 173 करोड़ रूपये है। अल्मोड़ा, हल्द्वानी व देहरादून मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं को बढ़ाने व राज्य में नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना के लिए भारत सरकार से 1 हजार करोड रूपये की वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी। भारत सरकार की मॉडल स्कूल पॉलिसी की तर्ज पर ही उत्तराखण्ड में आवासीय विद्यालयों की स्थापना के लिए नई योजना बनायी गई है। केन्द्र सरकार से इसके लिए 1500 करोड़ रूपये की सहायता की आवश्यकता है। वर्ष 2018 में 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजना उत्तराखण्ड में किया जाना है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने राज्य में खेल अवसंरचना व भवनों के निर्माण के लिए 719 करोड़ 44 लाख रूपये जबकि खेलों के आयोजन व प्रबंधन के लिए 249 करोड़ 97 लाख रूपये की सहायता राशि दिए जाने का भी अनुरोध किया।


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