‘काफल’ में लीजिए उत्तराखण्डी खाने का मजा Enjoy Uttarakhandi cuisine when in Dehradun

‘काफल’ में लीजिए उत्तराखण्डी खाने का मजा Enjoy Uttarakhandi cuisine when in Dehradun

जब भी आप देहरादून में हों तो सहस्त्रधारा रोड में खुले नए रेस्टोरेंट ‘काफल’ में जाना न भूलें जहाँ आपको मिलेगा उत्तराखंड के तीन जायकों — गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी — का मजा. आइये जानते हैं क्या ख़ास है इस अनोखी पहल में…


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-दमाउ और मस्कबीन की मधुर धुनों के बीच देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित आईटी पार्क के निकट ‘काफल’ रेस्टोरेंट का विधिवत शुभारंभ किया गया। बतौर मुख्य अतिथि नेहरू पवर्तारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल व लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने फीता काटकर शुभारंभ किया।


उत्तराखंड सरकार द्वारा हस्तकलां व स्थानीय उत्पादों को प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए कुछ वर्ष पूर्व सहस्त्रधारा रोड पर आईटी पार्क के सामने उतरा हाट की स्थापना की गई थी। उत्तराखंड सरकार द्वारा अब उतरा हाट के अधीन चलने वाले रेस्टोरेंट के संचालन का जिम्मा हिमालयन फिल्मस कंपनी को सौंपा गया है। उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्द्धन के क्षेत्र में काम करने वाली हिमालयन फिल्मस ने इस रेस्टोरेंट का नाम ‘काफल’ रखा है। इसी कड़ी में हिमायलन फिल्म पहाड़ के खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए इस रेस्टोरेंट का संचालन कर रही है।


पर्यटक व स्थानीय लोग यहां पर भारतीय व्यंजनों के साथ ही मल्टीकुजींन पकवानों सहित पहाड़ी व्यंजनो का लुत्फ ले सकेंगे। ‘काफल’ का शुभारंभ करते हुए कर्नल कोठियाल ने कहा कि यह स्थानीय उत्पादों को बढावा देने की दिशा में सराहनीय प्रयास है।  ‘काफल’ रेस्टोरेंट को संचालित करने वाली हिमालयन फिल्मस, न्यूजीलैंड में विगत कई वर्षो से सफल व्यवसाय कर रही इंडियन एरोमा कंपनी की ही एक यूनिट है। इंडियन एरोमा न्यूजीलैंड में रेस्टोरेंट चेन का संचालन करती है।


इस मौके पर लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि पहाड़ के पारंपरिक खान-पान को प्रोत्साहन करने की जरुरत है। आधुनिक युग में हमारे पारंपरिक व्यंजन लुप्त होते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि व्यायसायिक समझ के साथ स्थानीय खाद्य पदार्थों के लिए बाजार तैयार किया जाना चाहिए।


इस अवसर पर ढोल -दमाँऊ पर आधारित लघु फिल्म एवं डाम्युमेंटरी का भी विमोचन किया गया। जिसमें पहाड़ के प्रमुख वाद्य यंत्र ढोल -दमाँऊ बजाने वाले औजियों की दयनीय सामाजिक-आर्थिक हालात को दिखाया गया है। इसके लिए हमारे समाज को सामूहिक प्रयास करना होगा।


हिमालयन फिल्म के प्रबन्ध निदेशक रविन्द्र लखेडा बताया कि उनकी कंपनी एक ओर जहां लम्बे समय से लोक संगीत को बढ़ावा देने के काम में लगी हुई है, वहीं अब कंपनी पारंपरिक उत्तराखंडी खान-पान को प्रोत्साहित करेंगे। विश्व पर्यटन में स्थानीय खान-पान सैलानियों के लिए प्रमुख आर्कषण का केन्द्र होता है। उत्तराखंड में भी कंपनी सैलानियों के लिए स्थानीय खान-पान उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।


इस कार्यक्रम में देवप्रयाग से आए सोहनलाल और उनके साथियों ने पारंपरिक लोक वाद्ययों के माध्यम से लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर उत्तराखंड फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकार बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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eople of Uttarakhand will now get a chance to taste the traditional cuisines of Uttarakhand whenever they are in Dehradun. A restaurant, set up with the main motive of promoting the food culture of Garhwal, Kumoan and Jaunsar hills began operation in the state Capital on July 10, 2016. ‘Kaafal’ restaurant, operating from Uttarakhand government established handicraft emporium campus at Sahastradhara road, was formally launched by Nehru Institute of Mountaineering’s Principal Colonel Ajay Kothiyal.


Uttarakhand’s leading music company, the Himalayan Films, has taken up the new initiative for promoting Uttarakhandi cuisines. The Himalayan Films is part of Indian Aroma – which operates a successful chain of restaurants in New Zealand.  Besides offering Indian, Chinese and multi cuisines, ‘Kaafal’ restaurant aims to offer hill delicacies in Dehradun.


Praising the move, Colonel Ajay Kothiyal said, “Such initiatives are required to promote the hill food culture.” The opening was marked by a colorful cultural programme. Folk artist Sohan Lal and his team came all the way from Devprayag and mesmerized the guest by playing melodious tunes. Young folk artists presented folk dance to woo one and all at the function.


Uttarakhand’s leading folk singer Narendra Singh Negi was also present on the occasion and said, “The need of the time is to promote Uttarakhandi cuisines in the public.” Ravinder Lakhera, Mohan Lakhera, Nand Kishore Hatwal and others were present on the occasion.

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