उत्तराखंड आयुर्वेदिक और यूनानी विभाग के निदेशक पद पर डी॰पी॰सी॰ की माँग

उत्तराखंड आयुर्वेदिक और यूनानी विभाग के निदेशक पद पर डी॰पी॰सी॰ की माँग

प्रान्तीय आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने निदेशक पद पर तत्काल डी0पी0सी0 (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमीटी) कराये जाने की माँग की है…

प्रान्तीय आयुर्वेदिक यूनानी सेवा संघ का प्रतिनिधि मण्डल उत्तराखंड के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री डा0 हरक सिंह रावत से मिला। प्रतिनिधि मण्डल ने एन0पी0ए0, डी0ए0सी0पी0, डी0पी0सी0, ए0सी0पी0, पी0जी0 भत्ता सहित पूर्णकालिक चिकित्सा संवर्ग के निदेशक के पद हेतु तत्काल डी0पी0सी0 कराये जाने की मांग की। हर बिन्दु पर प्रान्तीय महासचिव डा0 हरदेव सिंह रावत की विस्तृत वार्ता हुई, जिसमें डा0 हरदेव सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड आयुर्वेदिक और यूनानी विभाग के वर्तमान निदेशक डा0 अरूण कुमार त्रिपाठी वर्तमान सेवा नियमावली के अनुसार निदेशक पद की अर्हता को पूरा नहीं करते है:-

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1. चूंकि अब प्राचार्य का पद विश्वविद्यालय में परिसर निदेशक के रूप में जिसमें शासन 3 कार्यवृत्तों में स्पष्ट रूप से आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय एवं ऋषिकुल/गुरूकुल परिसर हेतु सृजित पदो के सापेक्ष नियुक्त किये गये कार्मिकों के विकल्प पत्र प्राप्त नहीं किये गये ऐसा लिखा है।

2. सेवा नियमावली 2011 को पुनः 2016 में संशोधन द्वारा वर्तमान निदेशक डा0 अरूण कुमारा त्रिपाठी द्वारा स्तम्भ 2 में प्रतिस्थापित नियमों में दिशा निर्देश को बिना विभागीय प्रस्ताव एवं संगठन को विश्वास में लिए पूर्व के आयुष/आयुष शिक्षा मंत्री के प्रभाव से अनावश्यक संशोधन कराया और उसके बाद वर्तमान निदेशक ने सेवा नियमावली के ही न्यायालय में चुनौती दे डाली, क्योंकि संशोधन कराने के बावजूद भी वे नियमावली के अनुसार अर्हता पूरी नहीं करते हैं।

3. पूर्णकालिक चिकित्सा संवर्ग के निदेशक के न होने से विभाग में विभागीय प्रोन्न्तियाँं सुदूरवर्ती क्षेत्रीय अस्पतालों की दयनीय स्थिति, औषधियों की उपलब्धता एवं गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा पा रहा है।

4. निदेशक, डा0 अरूण कुमार त्रिपाठी की कार्य व्यस्तता इतनी है कि इनको ड्रग कन्ट्रोलर, लाइसेंसिंग अधिकारी, निदेशक एवं कुलसचिव उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का कार्यभार दे दिया गया है, जिसका असर आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों के एन0पी0ए0 जैसी महत्वपूर्ण शासनादेश को लागू कराने में विलम्ब के रूप में सामने आ रहा है, जबकि अपने हितों हेतु निदेशक महोदय सेवा नियमावली में बिना संगठन को विश्वास में ले एवं विभागीय प्रस्ताव बनाये बगैर ही सीधे पूर्व आयुष/आयुष शिक्षा मंत्री से संशोधन करा लिया गया है। वर्तमान निदेशक महोदय का सम्पूर्ण समय शासन-प्रशासन को मैनेज करने में जाता है।

5. आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों में वर्तमान आयुर्वेद निदेशक के प्रति घोर आक्रोश है, क्योंकि प्रान्तीय संगठन के आन्दोलन के उपरान्त प्राप्त एन0पी0ए0 शासनादेश के भुगतान को बाधित करने हेतु पूर्व आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री द्वारा प्रतिलिपि मात्र से प्रेषित पत्र सं0- 144-1 मंत्री, वी0आई0पी0/चिकित्सा स्वास्थ्य/म0वि0 /2017 दिनांक 04.01.2017 पर अनावश्यक संज्ञान लेकर एन0पी0ए0 के शासनादेश के बारे में उक्त पत्र का हवाला देकर एन0पी0ए0 के भुगतान को बाधित करने का प्रयास किया गया, जिस कारण 800 आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों केा प्रतिमाह आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रान्तीय संगठन के महासचिव डा0 हरदेव सिंह रावत द्वारा मा0 मंत्री से निदेशक द्वारा एन0पी0ए0 के शासनादेश को बाधित करने हेतु पूर्व आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री के सचिव को सम्बोधित पत्र की प्रतिलिपि का अनावश्यक संज्ञान लिए जाने की जांच कराये जाने की मांग की। प्रान्तीय संघ के अध्यक्ष डा0 कृष्ण सिंह नपच्याल का कहना है कि इतने बड़े संवर्ग में पूर्णकालिक चिकित्सा संवर्ग के निदेशक पद की डी0पी0सी0 न होना अन्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि निदेशक पद पर डी0पी0सी0 शीघ्र न करायी गयी तो प्रान्तीय आयुर्वेद यूनानी चिकित्सा सेवा संघ मजबूर होकर पुनः आन्दोलन के लिए बाध्य होगा।

प्रतिनिधिमण्डल में प्रान्तीय महासचिव डा0 हरदेव सिंह रावत, प्रान्तीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा0 नवीन जोशी, डा0 मदनपाल- जिला अध्यक्ष देहरादून, कार्यालय सचिव- डा0 हर्ष सिंह धामी आदि मौजूद रहे, जिन्होंने विभागीय निदेशक, चिकित्सा संवर्ग सेवा की डी0पी0सी0 शीघ्र कराने की मांग की जो वर्तमान में उनको उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्णकालिक कुलसचिव के रूप में कार्य देने हेतु अनुरोध करता है।


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